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सरकार की योजनाओं को ठेंगा दिखा रहे प्राइवेट बैंक, छोटे लोन देने से कर रहे गुरेज

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : प्राइवेट बैंक आम आदमी को सरकारी योजनाओं के तहत छोटे-मोटे लोन देने की बजाय उनसे कन्नी काट रहे हैं। लोग जब 20 से 50 हजार रुपये तक का लोन लेने जाते हैं तो उन्हें एक ही जवाब दे दिया जाता है कि बैंक के टारगेट पूरे हो गए हैं। कई बैंक तो ऐसे हैं जिन्होंने गत वर्ष में एक भी लोन नहीं किया। इसके विपरीत जब कोई व्यक्ति इंडस्ट्री या फिर बड़ा काम करने के लिए लाखों का लोन लेने जाता है तो उसे हाथों हाथ लोन दे दिया जाता है। लोन नहीं देने वाले प्राइवेट बैंकों को डीसी मुकुल कुमार ने कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही एलडीएम सुनील चावला ने भी पत्र लिख कर सभी बैंकों को लोन के टारगेट पूरे करने को कहा है। बड़े लोन देने से बैंक को ज्यादा फायदा

राज्य व केंद्र सरकार की जो योजनाएं होती हैं उनके अनुसार किसी भी सरकारी या फिर प्राइवेट बैंक से लोन लिया जा सकता है। यह लोन पात्र अपनी आवश्यकता तथा प्रोजेक्ट के अनुसार जितना चाहे ले सकता है। जैसे प्रधानमंत्री ने लोगों को रोजगार के लिए शिशु, किशोर व मुद्रा योजना चला रखी है। शिशु योजना के तहत 50 हजार रुपये तक, किशोर में 50 हजार से पांच लाख तक व मुद्रा में पांच लाख से अधिक का लोन बैंक से लिया जा सकता है। परंतु प्राइवेट बैंक शिशु योजना के तहत लोगों को लोन नहीं दे रहे। क्योंकि इतनी राशि पर ब्याज दर भी कम होती है। जबकि पांच लाख से अधिक लोन पर बैंक को अच्छा खासा ब्याज मिल जाता है। यही वजह है कि छोटे लोन देने में प्राइवेट बैंक पिछड़ रहे हैं और जब बात बड़े लोन देने की आती है तो ये सरकारी बैंकों को भी कई गुना पीछे छोड़ देते हैं। प्राइवेट बैंकों द्वारा प्राप्त टारगेट :

प्राइवेट बैंकों मे कृषि ऋण में एक्सिस बैंक ने 16 प्रतिशत, डीसीबी बैंक ने शून्य प्रतिशत, आइडीबीआइ ने 6, इंडस्ड बैंक, जेएंडके बैंक व कैप्टिल एसएफ बैंक ने शून्य प्रतिशत टारगेट प्राप्त किया है। सरकारी बैंकों में आंध्रा बैंक, बीओएम, इंडियन बैंक, यूनाइटेड बैंक कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने 10 प्रतिशत से कम लोगों को लोन दिए हैं। इसी तरह फसली ऋण में एक्सिस बैंक ने 19 प्रतिशत, बंधन, डीसीबी, इंडस्ड बैंक, जेएंडके, यस बैंक, एयू स्माल बैंक, केप्टिल बैंक ने जीरो प्रतिशत लोन दिए हैं। कष्ट निवारण समिति में भी उठ चुका मामला

प्राइवेट बैंकों द्वारा लोन नहीं दिए जाने का मामला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री अनिल विज के समक्ष भी उठ चुका है। शिकायतकर्ताओं ने कहा था कि वे बैंक में लोन लेने जाते हैं तो उन्हें परेशान किया जाता है। तब मंत्री ने बैंक प्रबंधकों को कड़ी फटकार लगाई थी। पांच दिन पहले सचिवालय में डीसी मुकुल कुमार ने बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन की समीक्षा की तो उसमें भी प्राइवेट बैंकों द्वारा छोटे लोन नहीं देने का मामला उठा था। बड़े लोन देकर टारगेट पूरे करते हैं : सुनील चावला

एलडीएम सुनील चावला ने बताया कि प्राइवेट बैंक सरकारी योजनाओं के तहत छोटे लोन लोगों को नहीं देते। अधिक ब्याज के कारण वे पर्सनल लोन, कार लोन, होम लोन व अन्य बड़े लोन देकर अपने टारगेट पूरे कर लेते हैं। जो बैंक लोन नहीं दे रहे उनकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी है।

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