नशा छोड़ चुके युवाओं को अब पुलिस बनाएगी नशे के खिलाफ हथियार

नशा छोड़ चुके युवाओं को अब पुलिस नशे के खिलाफ हथियार बनाएगी। इन युवाओं के जरिए उन लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। जो अभी नशे की गर्त में है। इसमें समाजसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। संस्था के सदस्य अपने आसपास के ऐसे लोगों की सूची तैयार करेंगे। जो नशे की गिरफ्त में है। पुलिस विभाग इन युवाओं को नशा छोड़ने के लिए जागरूक करेगा।

JagranFri, 17 Sep 2021 06:35 AM (IST)
नशा छोड़ चुके युवाओं को अब पुलिस बनाएगी नशे के खिलाफ हथियार

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जागरण संवाददाता, यमुनानगर : नशा छोड़ चुके युवाओं को अब पुलिस नशे के खिलाफ हथियार बनाएगी। इन युवाओं के जरिए उन लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। जो अभी नशे की गर्त में है। इसमें समाजसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। संस्था के सदस्य अपने आसपास के ऐसे लोगों की सूची तैयार करेंगे। जो नशे की गिरफ्त में है। पुलिस विभाग इन युवाओं को नशा छोड़ने के लिए जागरूक करेगा। उनका इलाज कराएगा। यहां तक कि यदि किसी को दवाई या इलाज के लिए आर्थिक दिक्कत है, तो उसका भी सहयोग किया जाएगा। अंबाला रेंज की आइजी भारती अरोड़ा ने यह मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत ही वीरवार को एसपी कमलदीप गोयल ने उन युवाओं से बातचीत की, जो नशा छोड़ चुके हैं। इन युवाओं का अनुभव जाना और नशा छुड़वाने में पुलिसकर्मियों की ओर से किए गए सहयोग के बारे में भी जाना। नशा छोड़ चुके युवाओं यदि रोजगार की जरूरत है, तो इसके लिए भी एसपी ने उन्हें आश्वस्त किया। कई युवा कंप्यूटर के एक्सपर्ट भी थे, तो उनको भी नौकरी देने की पेशकश की। इस दौरान डीएसपी प्रमोद कुमार, ओम सेवा संस्था के संचालक सुशील आर्य, जन कल्याण समिति से पवन गुप्ता भी मौजूद रहे। एसपी ने कहा कि नशे की वजह से क्राइम बढ़ रहा है। ऐसे लोगों को जेलों में डालना ही समाधान नहीं है। इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए उन्हें सही दिशा में मोटिवेट करना होगा। इन पुलिसकर्मियों के सहयोग से छोड़ा युवाओं ने नशा : एएसआइ निर्मल सिंह : इन्होंने बिलासपुर निवासी राजीव व प्रदीप को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया। अक्सर इन युवकों के परिवार के लोग उनकी शिकायत लेकर थाने में आते थे। जिस पर वह इन युवकों को सिविल अस्पताल में लेकर पहुंचे और उनका इलाज शुरू कराया। एएसआइ राकेश कुमार : इन्होंने रजनीश की नशा छुड़वाने में मदद की। उसका इलाज कराया। पांच माह तक इस युवक को डिएडिक्शन सेंटर में भी रखवाया। एएसआइ परविद्र सिंह : इन्होंने विजय व मलकीत का नशा छुड़वाया। दोनों युवक नशे में परिवार के साथ झगड़ा करते थे। कई बार इनकी शिकायतें भी आई। जिस पर उन्हें समझाया और सिविल अस्पताल में डाक्टर के पास ले जाकर इलाज कराया। एएसआइ जसबीर सिंह, एसपीओ सुखविद्र सिंह व कांस्टेबल संदीप सिंह : इन पुलिसकर्मियों ने नौ युवाओं का नशा छुड़वाया। यह युवा स्मैक की लत का शिकार हो चुके थे। इनको सिविल अस्पताल में लेकर गए। जहां से इलाज कराया। अब यह युवा नशे से दूर हैं। युवाओं ने साझा किए अनुभव : 1. मैं थाने के बाहर चाय की दुकान करता हूं। इस दौरान गांव के ही कुछ युवकों के साथ मिलकर नशे की लत में पड़ गया। रोजाना एक हजार से 1200 रुपये स्मैक पर खर्च कर देता था। पिता के साथ भी झगड़ा होता था। बाद में पीपली में नशा मुक्ति केंद्र में रहा। सुबह बिना नशा किए उठा तक नहीं जाता था। अब धीरे-धीरे नशे से दूर हो चुका हूं। परिवार भी खुश है। ऐसा लग रहा है कि अब मेरा नया जीवन शुरू हुआ है- रजनीश। 2. मैं नशा करने के लिए कैप्सूल लेता था। शादी हो चुकी है। नशे की वजह से घर में कलह रहती थी। बस मुझे नशे की धुन रहती थी। रोजाना 300 से 400 रुपये इस पर खर्च हो जाते थे। बाद में बराड़ा के पास नशा मुक्ति केंद्र में रहा। अब दो माह से नशे से पूरी तरह से दूर हूं। अपनी खेती बाड़ी में ध्यान लगाया हुआ है।- राजीव 3. मेरा एक एनआरआइ दोस्त आया था। उसके साथ स्मैक की लत लग गई। करीब दो साल तक नशे की गिरफ्त में रहा। काम पर भी ध्यान नहीं दिया गया। परिवार भी इस लत की वजह से परेशान रहता है। मुझे केवल नशे की धुन थी। फिर सिविल अस्पताल से इलाज कराया। वहां से भी आराम नहीं मिला, तो प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज कराया। अब तीन माह हो गए। पूरी तरह से ठीक हूं।- दीपचंद एसपी ने दोस्त का उदाहरण देकर समझाया : एसपी कमलदीप गोयल ने नशा छोड़ चुके युवाओं की काफी सराहना की। उन्होंने युवाओं से सवाल जवाब भी किए। अपने एक दोस्त का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उनका एक दोस्त नशे की लत का शिकार हो गया था। पहले उसका पता नहीं लग पाया था। वह उनके पास बैठता था, तो थोड़ी-थोड़ी देर बाद उठकर चला जाता था। जब उसकी इस लत का पता लगा, तो उसका इलाज कराया। दोस्त सोचता था कि वह कभी नशा नहीं छोड़ पाएगा। जिस पर उसे लगातार मोटिवेट किया। अब वह पूरी तरह से नशे से मुक्त है। नशा करने वाले युवाओं की करेंगे पहचान : एसपी कमलदीप गोयल ने बताया कि गैर सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर टीम बनाई जाएगी। इस टीम में एक डाक्टर व पुलिसकर्मी को शामिल किया जाएगा। इससे पहले संस्थाओं के माध्यम से नशा करने वाले युवाओं की सूची तैयार की जाएगी। फिर ग्रुप बनाकर इन युवाओं को मोटिवेट किया जाएगा। इसके साथ ही नशा छोड़ने की कोशिश करने वाले युवाओं को मोटिवेट करने के लिए एक डिएडिक्शन हेल्पलाइन बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। जिस पर कोई भी नशा करने वालों के बारे में सूचना दे सके। साथ ही ऐसे युवा भी वहां से सलाह ले सके। जो नशा छोड़ना चाहते हैं।

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