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लिग जांच व भ्रूण हत्या कराने वालों पर खुफिया नजर, हर गर्भवती का है रिकार्ड : रेणू चावला

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : महिलाओं एवं बच्चों के विकास और लिगानुपात में सुधार के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अथक प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोना काल में डोर स्टेप तक पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही लिग जांच और भ्रूण हत्या जैसे अपराध को रोकने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। लिंगानुपात में काफी सुधार आया है। एक हजार लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या का आंकड़ा 950 को छूने जा रहा है। विभाग से जुड़ी अन्य तमाम योजनाओं को लेकर दैनिक जागरण संवाददाता संजीव कांबोज ने विभाग की कार्यक्रम अधिकारी रेणू चावला से बातचीत की। सवाल : जिले में कुल कितने आंगनबाड़ी केंद्र हैं और बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने व महिलाओं के विकास को लेकर विभाग की ओर से क्या-क्या योजनाएं चलाई जा रही हैं।

जवाब : कुल 1281 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। केंद्रों पर छह वर्ष तक के बच्चों, दूध पिलाने वाली, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों का मनोवैज्ञानिक, शारीरिक व स्वास्थ्य में सुधार ही विभाग का उद्देश्य है। सवाल : जिले में लिगानुपात की क्या स्थिति है और सुधार के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

जवाब : लिंगानुपात में जबरदस्त सुधार आया है। इसे भविष्य में और भी बेहतर बनाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास गांव की सभी गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड होता है। इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है कि कोई भी महिला लिग जांच व भ्रूण हत्या जैसा घिनौना काम न करें। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर समय-समय अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रेड भी की जाती है। सवाल : कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाइट की समस्या रहती है जिसके चलते गर्मियों में परेशानी बढ़ जाती है।

जवाब : आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाइट की समस्या को दूर करने के लिए सोलर लाइट सिस्टम लगाए जा रहे हैं। जो भवन विभाग के हैं, उनमें अधिकांश पर यह व्यवस्था हो चुकी है। जल्दी ही सभी केंद्र कवर हो जाएंगे। उसके बाद दिक्कत नहीं रहेगी। सवाल : निजी भवनों में चल रहे केंद्रों के किराए की समस्या कई बार एसोसिएशन के स्तर पर उठाई जाती रही है।

जवाब : पहली बात तो यह है कि किराए की समस्या लगभग दूर हो चुकी है। अर्बन एरिया में थोड़ा बहुत पेंडिग रहता है। उसका समाधान भी जल्दी हो जाएगा। यदि कोई भी ग्राम पंचायत या संबंधित क्षेत्र का पार्षद जगह उपलब्ध कराए तो विभाग नियमानुसार अपना भवन बनाने के लिए बजट उपलब्ध कराता है। छह केंद्रों की डिमांड आई हुई है। सवाल : पोषाहार के तौर पर क्या-क्या दिया जा रहा है, क्या सुधार की कोई योजना है?

जवाब : आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले पोषाहार में मीठा दलिया, आलू-पूरी, मीठा चावल, मीठा गुलगुला, भरवा पराठा और नमकीन चावल शामिल है। इसके लिए अलग-अलग दिन निर्धारित हैं। कोरोना वायरस से बचाव के चलते इन दिनों आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा अनुसार उनके घर पर पोषाहार उपलब्ध करवा रही हैं। भविष्य में फोर्टिफाइड स्कीम्ड मिल्क पाउडर (सूखा दूध) उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है। सवाल : महिलाओं पर होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं ?

जवाब : महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से कई तरह की योजनाएं चलाई हुई हैं। महिलाओं को सुरक्षा प्रदान के लिए वन स्टॉप सेंटर की योजना शुरू की हुई है। यहां किसी भी तरह की हिसा से पीड़ित महिला को अस्थाई आश्रय, विधि सहायता व चिकित्सा की सुविधा दी जाती है।

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