डिस्ट्रिक्ट वाटर लैब को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता, पानी की शुद्धता पर बढ़ेगी विश्वसनीयता

डिस्ट्रिक्ट वाटर लैब को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता, पानी की शुद्धता पर बढ़ेगी विश्वसनीयता
Publish Date:Sat, 24 Oct 2020 06:09 AM (IST) Author: Jagran

राजेश कुमार, यमुनानगर

डिस्ट्रिक्ट वाटर टेस्टिग लैब अब जिलास्तर पर सीमित नहीं रहेगी। लैब में देश के किसी भी हिस्से से आए पानी की जांच लैब में हो सकेगी। इसके लिए डिस्ट्रिक्ट वाटर टेस्टिग लैब का एनएबीएल (भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के राष्ट्रीय परीक्षण और शोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड) से रजिस्ट्रेशन कराया गया है। मात्र कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी बाकी हैं जो अंतिम दौर में हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद कोई भी लैब में टेस्ट हुए पानी की गुणवत्ता को चैलेंज नहीं कर पाएगा। ट्रायल के तौर पर भेजे सैंपल की हुई जांच

एनएबीएल की चंडीगढ़ स्थित ब्रांच से ट्रायल के तौर पर पानी का सैंपल डिस्ट्रिक वाटर टेस्टिग लैब में जांच के लिए भेजा गया था ताकि पता लगाया जा सके कि लैब राष्ट्रीय स्तर की मान्यता के लिए मानकों पर खरी उतरती भी है या नहीं। सैंपल की जांच कर जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने रिपोर्ट भेज दी है। इसमें अब बड़े स्तर पर काम होगा तो सात लाख रुपये से अधिक कीमत के नए उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं। इनमें यूवी स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, डिजिटल पीएच, टीडीएस मीटर, यूवी लेमिनर एअरफ्लो चैंबर, डबल डेस्टिनेशन, स्पेसिफिक इओन मीटर समेत सैकड़ों तरह के छोटे-बड़े उपकरण शामिल हैं। केंद्र से फंड मिलने की संभावना बढ़ी

एनएबीएल से मान्यता मिलने के बाद डिस्ट्रिक्ट वाटर टेस्टिग लैब को केंद्र सरकार से भी फंड मिलने की संभावना बढ़ गई है। कोई भी सरकारी विभाग या प्राइवेट व्यक्ति लैब में पानी, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की जांच करवा सकेगा। पहले यह लैब जगाधरी में विभाग के एसडीओ कार्यालय के साथ एक छोटे से कमरे में चल रही थी। वहां से लैब को गाबा अस्पताल के सामने लाखों रुपये से बनाए नए भवन में शिफ्ट किया गया है। जल्द ही केंद्रीय जल राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया लैब का उद्घाटन करेंगे।

लैब के सहायक केमिस्ट सुखविद्र सिंह ने बताया कि लैब में पानी के टेस्ट से लेकर टीडीएस, बैक्टीरिया, मेगनीशियम, लोहतत्व, पीएच समेत 13 प्रकार के टेस्ट किए जा रहे हैं। लैब में हर साल 3000 सैंपल की जांच करने का टारगेट दिया जाता है। फिलहाल हर माह 300 से 400 सैंपल की जांच की जा रही है। जांच प्रमाणित होगी : श्याम लाल

जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के एसडीओ श्याम लाल का कहना है कि एनएबीएल से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद जल संस्थान की जांच प्रमाणित होगी। इससे पता चल जाएगा कि जांचे गए पानी में क्या कमी है या फिर शुद्ध है। लैब को नया भवन भी मिल गया है। मान्यता के लिए काफी समय से प्रयास किए जा रहे थे।

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