चुनावी घोषणा पत्र तक सिमटे 69 कालोनियों में विकास के वादे, सत्ता में आने पर भी नहीं ध्यान

यमुनानगर-जगाधरी की 69 कालोनियों को विकास की दरकार है। यहां चुनाव के दिनों में दावे तो खूब किए जाते रहे हैं लेकिन बाद में कालोनीवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इन कालोनियों में जन प्रतिनिधि आने तक जहमत नहीं उठाते। विकास कार्य करवाना तो दूर की बात है। चुनावों के दिनों में यह मुद्दा खूब उठता है। इन कालोनियों में सड़कें कच्ची पड़ी हैं। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। न की सफाई का प्रबंध हैं।

JagranTue, 28 Sep 2021 06:30 AM (IST)
चुनावी घोषणा पत्र तक सिमटे 69 कालोनियों में विकास के वादे, सत्ता में आने पर भी नहीं ध्यान

जागरण संवाददाता, यमुनानगर :

यमुनानगर-जगाधरी की 69 कालोनियों को विकास की दरकार है। यहां चुनाव के दिनों में दावे तो खूब किए जाते रहे हैं, लेकिन बाद में कालोनीवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इन कालोनियों में जन प्रतिनिधि आने तक जहमत नहीं उठाते। विकास कार्य करवाना तो दूर की बात है। चुनावों के दिनों में यह मुद्दा खूब उठता है। इन कालोनियों में सड़कें कच्ची पड़ी हैं। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। न की सफाई का प्रबंध हैं। कई जगह तो गलियां जंगल बनी हुई हैं। बदहाली ही इन कालोनियों की पहचान बनकर रह गई हैं। इनसेट

रादौर विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा कालोनियां :

69 कालोनियों में 30 से अधिक कालोनियां रादौर विधानसभा क्षेत्र में आती हैं। ये कालोनियां वार्ड 12, 19 21, 22 में हैं। विधानसभा चुनावों से पहले भी इन कालोनियों में विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए। इसको चुनावी मुद्दा बनाया गया। कालोनी वासियों ने भी यहां की बदहाली को प्रमुखता से जन प्रतिनिधियों के समक्ष रखा। आश्वासन भी मिला की सत्ता में आने के बाद इन कालोनियों में विकास की झड़ी लगा दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इन कालोनियों के विकास का मुद्दा विधानसभा में भी उठा चुके हैं। उसके बाद भी विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। कुछ कालोनियां यमुनानगर व जगाधरी विधानसभा क्षेत्र में भी आती हैं। इनमें भी स्थिति बद से बदतर है, जबकि दोनों विधानसभा में सत्ता पक्ष के विधायक हैं। इनसेट

बिना बारिश के भी कीचड़ हो जाता है गलियों में :

वर्ष-2018 में जिन कालोनियों को सीएम मनोहर लाल ने नियमित किए जाने की घोषणा की थी, उनके हालात आज भी गांवों से बदतर हैं। आंबेडकरपुरम निवासी गुरमुख सिंह, रामप्रकाश, घनश्याम व श्याम लाल का कहना है कि गलियों के हालात देखकर नहीं लगता कि हम शहर में रह रहे हैं। निकासी की व्यवस्था न होने के कारण कच्ची गलियों में जल भराव की स्थिति रहती है। बारिश होने पर परेशानी और भी बढ़ जाती है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी नहीं है। गलियों के दोनों ओर बड़ी झाड़ियां उग चुकी हैं। जहरीले जीव घरों में घुस जाते हैं। नगर निगम अधिकारियों से बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद उनकी समस्या दूर नहीं हो पाई है। इनसेट

विकास कार्य नहीं करवाते तो टैक्स क्यों ले रहे हैं अधिकारी :

रामनगर निवासी वीरेंद्र सिंह, कमलनगर निवासी नितीश कुमार व सुंदर विहार के आशीष, राजीव गार्ड निवासी रमेश का कहना है कि जब वह हर तरह का टैक्स दे रहे हैं तो उनको मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों रखा जा रहा है। 25-30 वर्ष पुरानी इन कालोनियों में रहने वाले लोगों ने बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। डेढ़ लाख की आबादी परेशान हैं। गलियां कच्ची हैं। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। मेयर व डीसी आफिस पर धरने की तैयारी :

सुविधाएं नहीं मिलने से लोग अधिकारी व जनप्रतिनिधियों से खफा हैं। वीरेंद्र शर्मा, नितिन, रविद्र कुमार, अमरीश कुमार, ब्रिजेश कुमार, जसमेर सिंह का कहना है कि उनकी कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। अब विकास कार्यों के लिए धरने की तैयारी कर रहे हैं। इस बारे बैठक की जाएगी। इसमें चर्चा कर तय किया जाएगा कि धरना मेयर हाउस पर दिया जाएगा या फिर डीसी कार्यालय के बाहर। जब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलेगी। धरना दिया जाएगा।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.