दहिया खाप ने भी किया जाट आरक्षण की मांग का समर्थन

जागरण संवाददाता, गोहाना : अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा आरक्षण और इससे जुड़ी मांगों को लेकर लाठ-जौली में आयोजित किए जा रहे जिलास्तरीय धरने पर 14वें दिन शनिवार को दहिया खाप के प्रमुख पूर्व एसीपी महावीर ¨सह दहिया भी पहुंचे। उन्होंने जाट आरक्षण की जोरदार वकालत करते हुए इस मांग का खुला समर्थन किया। उनके साथ अर्जुन अवार्ड से अलंकृत भारत केसरी पहलवान संजय म¨टडु भी पहुंचे।

महावीर ¨सह दहिया ने जाट समाज की एकजुटता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अगर एकजुट रहे तो सरकार द्वार पर आ कर खुद आरक्षण दे कर जाएगी। उन्होंने कहा कि जाटों की भावी पीढ़ी को उज्ज्वल और सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि अब जाट समाज अपने आरक्षण के हक को हासिल कर ही ले और तब तक धरनों से न उठे जब तक आरक्षण मिल न जाए। उन्होंने धरनों के शांतिपूर्ण बने रहने पर खास जोर दिया। संजय म¨टडु ने बिना किसी जाति का नाम लिए कहा कि आरक्षण के बूते पर ऐसे-ऐसे लोग चिकित्सक बनने में कामयाब हो जाते हैं जिन्हें इंजेक्शन तक लगाना नहीं आता। उन्होंने जाटों के लिए आरक्षण की इस आधार पर वकालत की कि जाटों के पास अब खेती-बाड़ी की जमीन भी नहीं रही। धरने पर सर्व जातीय सर्व महिला खाप की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया भी समर्थन देने पहुंचीं। दिल्ली रोहिणी जाट सभा के अध्यक्ष कर्मबीर खत्री का लिखित समर्थन पत्र पूर्व विधायक सुखबीर फरमाणा ने धरनास्थल पर पढ़ा। फरमाणा के साथ इस सभा के दो पूर्व अध्यक्ष विद्या प्रकाश लोहचब और जोगेंद्र गहलावत भी आए।

सांसद को सुप्रीम कोर्ट तक भी घसीटूंगी

सर्व जातीय सर्व महिला खाप की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राज कुमार सैनी के खिलाफ उनकी जाट समाज की टिप्पणियों को लेकर मान हानि का केस कर रखा है। डॉ. दहिया ने कहा कि बेशक राज कुमार सैनी सुप्रीम कोर्ट में चले जाएं, छोड़ने वाली मैं भी नहीं, उन्हें वहां भी घसीटूंगी और सजा दिलवा कर रहूंगी। समाज में जहर घोलने वाली माफी के काबिल बिलकुल भी नहीं हैं।

धरने पर पुरुषों के बराबर पहुंची महिलाओं की संख्या

लाठ-जौली चौक के निकट चल रहे धरने पर अब महिलाएं पूरी तरह से छा गई हैं। 14 दिन पहले जब यह धरना प्रारंभ हुआ था, तब महिलाएं पंडाल के आगे के छोटे से हिस्से में बैठा करती थीं। लेकिन महिलाओं की उपस्थिति पर पकड़ बड़ी तेजी से इतनी मजबूत होती चली गई कि अब महिलाएं पुरुषों से अधिक न सही, पर उनके बराबर के करीब पहुंच रही हैं। महिलाएं पंडाल के आगे के हिस्से के साथ पीछे तक बैठी दिखाई देने लगी हैं। किसी भी सामान्य समारोह में महिलाओं की इतनी हाजिरी कभी नहीं होती जितनी आरक्षण के धरने पर देखने में आ रही है। ज्यादातर महिलाएं रोजाना और अपने गांवों से अपने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों में बैठ कर आ रही हैं। महिलाओं की स्पेशल ट्रालियां भरी नजर आती हैं। महिलाओं में बुजुर्ग महिलाओं की संख्या अधिक है। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित प्राध्यापिका डॉ. संतोष दहिया, खानपुर कलां गांव की बारहवीं कक्षा की छात्रा प्रीति और मिर्जापुर खेड़ी गांव की बुजुर्ग सरोज आर्य खुद ट्रैक्टर चला कर धरना स्थल पर पहुंचीं।

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