वीरता व साहस का प्रतीक है माता कालरात्रि : साध्वी मानेश्वरी

वीरता व साहस का प्रतीक है माता कालरात्रि : साध्वी मानेश्वरी

माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री के सानिध्य में शारदीय नवरात्र में शुक्रवार को मां जगदंबे के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई।

JagranSat, 24 Oct 2020 07:44 AM (IST)

जागरण संवाददाता, रोहतक : माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री के सानिध्य में शारदीय नवरात्र में शुक्रवार को मां जगदंबे के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने अखंड ज्योत के दर्शन कर सुख समृद्धि की मनोकामनाएं की। भक्ति में मस्त श्रद्धालुओं के मुख से जय माता दी, मां शेरावाली, मां मेरावाली, मां लाटा वाली, मां आप बुलांदी, बोल साचे दरबार की जय, भजनों पर मंत्रमुग्ध रहे। कार्यक्रम में साध्वी मानेश्वरी देवी ने प्रवचन देते हुए बताया ऐसी मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है। मां के इस रूप को वीरता व साहस का प्रतीक माना जाता है। मां कालरात्रि की कृपा से भक्त हमेशा भयमुक्त रहता है। उसे अग्रि जल, शत्रु आदि किसी का भय नहीं होता। माता कालरात्रि का शरीर काला है, उनके नाक में ज्वाला निकलती है। वे गले में नरमुंडों की माला पहनती हैं। मुर्दों पर सवार रहने वाली देवी दिखने में तो भयानक कितु सदैव भक्तों को शुभ फल और सुख देती हैं।

माता कालरात्रि की पूजा करने से दैत्य, दानव, राक्षस, भूत प्रेत का विनाश होता है। उन्होंने कहा हम और आप कालरूपी सर्प के मुख में बैठे हैं। यह काल रूपी सर्प कभी भी हमको डस सकता है। हमारी आयु दिन-प्रतिदिन घटती जाती है। जिस प्रकार टूटे घड़े में से पानी की बूंद एक-एक करके निकलती जाती है। इसलिए मनुष्य को जीवन में धर्म करना चाहिए। धर्म करने से पुण्य मिलता है। पुण्य की प्राप्ति से मोक्ष मिलता है।

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