सेक्टरों में बरसाती पानी की निकासी का मामला लटका, मानसून से पहले धरातल पर नहीं दिखे इंतजाम

बरसाती सीजन सिर पर है लेकिन सेक्टरों में धरातल पर काम नहीं हो रहे। ज्यादातर सेक्टर लो लाइन एरिया में हैं। बरसाती पानी की निकासी के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण(एचएसवीपी) और नगर निगम के बीच सेक्टर वाले अभी भी पिस रहे हैं।

JagranFri, 11 Jun 2021 05:04 AM (IST)
सेक्टरों में बरसाती पानी की निकासी का मामला लटका, मानसून से पहले धरातल पर नहीं दिखे इंतजाम

जागरण संवाददाता, रोहतक : बरसाती सीजन सिर पर है, लेकिन सेक्टरों में धरातल पर काम नहीं हो रहे। ज्यादातर सेक्टर लो लाइन एरिया में हैं। बरसाती पानी की निकासी के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण(एचएसवीपी) और नगर निगम के बीच सेक्टर वाले अभी भी पिस रहे हैं। अब मानसून से पहले बरसाती पानी की निकासी की मांग ने जोर पकड़ लिया है। वार्ड के पार्षद ने जलजमाव वाले प्रमुख स्थानों को चिह्नित करते हुए छह से आठ पंप सेट खरीदने और लगाने की मांग की है।

वार्ड-11 के पार्षद एवं सेक्टर-1 की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व प्रधान कदम सिंह अहलावत ने दावा किया है कि कुछ दिन पहले नगर निगम के एक जेई आए थे। बरसाती जल जमाव वाले स्थानों का ब्योरा मांगा था। हमने लिस्ट सौंप दी। कदम कहते हैं कि सेक्टर-1 में देवीलाल पार्क के निकट, सेक्टर-1 में सीआइए कार्यालय के निकट, सेक्टर-14, सेक्टर-2-3 पार्ट, सीनियर सिटीजन क्लब सेक्टर-3 आदि स्थानों पर पंप सेट लगवाने की तत्काल जरूरत है। वहीं, सेक्टर के महासचिव एडवोकेट केके खीरवाट कहते हैं कि देवीलाल पार्क वाली मुख्य सड़क पर दो से तीन फीट तक बरसाती पानी भर जाता है। पिछले दो-तीन साल से हालात खराब हैं। फिर भी समाधान नहीं हो रहा। इन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर-3, सेक्टर-4 एक्सटेंशन, सेक्टर-5, सेक्टर-14, सेक्टर-4, सेक्टर-1 में जलजमाव की बड़ी समस्या है। एचएसवीपी से निगम ने मांगे थे 70 करोड़

एचएसवीपी के 50 फीसद विकसित हो चुके प्रमुख पांच सेक्टर साल 2016 में नगर निगम के हवाले किए गए थे। हालांकि सीवरेज, पेयजल आपूर्ति और बरसाती पानी की निकासी को लेकर नगर निगम और एचएसवीपी के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। निगम का दावा है कि हमें सेक्टरों में सड़कों, पार्कों व स्ट्रीट लाइट की मरम्मत का जिम्मा मिला है। बाद में एचएसवीपी ने मुख्यालय स्तर पर बात की। अब बरसाती पानी की निकासी का जिम्मा भी निगम को मिल गया। निगम की टीम ने सेक्टरों में बरसाती पानी के इंतजामों के जायजे का हवाला देते हुए कहा कि अधूरे कार्य हैं। इन्हें पूरा कराने के लिए 60-70 करोड़ खर्च होंगे, एचएसवीपी जमा कराए। एचएसवीपी ने एस्टीमेट बनाकर दिसंबर में ही भेजा

एचएसवीपी के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि नगर निगम के अधिकारियों की मांग पर अपने एस्टीमेट बीते साल दिसंबर में ही बनाकर दे दिया। अब बड़ा सवाल यह है कि छह माह पहले ही एस्टीमेट बन गया तो अभी धरातल पर काम क्यों नहीं दिखे। नगर निगम ने भी काम कराने में देरी क्यों की। यह भी सवाल उठ रहा है कि निगम हाउस की बैठक अप्रैल में हुई थी। उस दौरान भी नगर निगम और एचएसवीपी के अधिकारियों का विवाद सामने आया था। उस समय यह बातें सामने नहीं आईं थीं। वर्जन

कोरोना से पहले हमने 60-65 लाख रुपये का टेंडर लगाने की तैयारी हुई थी। अब दोबारा से पता करेंगे कि क्या रहा। बरसाती पानी की निकासी के लिए बरसाती सीजन से पहले ही कार्य करा देंगे। इस बार मैं खुद निगरानी रखूंगा। सेक्टर वालों को दिक्कत नहीं होने दूंगा।

मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम

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नगर निगम के अधिकारियों ने बरसाती पानी की लाइनों की सफाई व मरम्मत कराने से लेकर जहां पाइप नहीं हैं वहां पाइप बिछाने आदि कार्यों के लिए एस्टीमेट मांगा था। हमने तो बीते साल दिसंबर में ही एस्टीमेट बनाकर दे दिया था। अब नगर निगम के अधिकारी ही बता पाएंगे कि इस प्रकरण में क्या हुआ।

डीके आहूजा, एक्सईएन, एचएसवीपी

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बरसाती पानी की निकासी के लिए हमें छह से आठ पंपसेट की जरूरत है। सेक्टरों में लो लाइन एरिया है। अभी तक बरसाती पानी की निकासी के लिए नगर निगम या फिर एचएसवीपी के अधिकारियों ने धरातल पर काम शुरू नहीं कराया।

कदम सिंह अहलावत, पूर्व प्रधान, रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-1 एवं वार्ड-11 के पार्षद

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