कर्म से वीर बन दूसरों के लिए नजीर बना किसान, पराली से एेसे तैयार कर रहा जैविक खाद

रोहतक [रतन चंदेल]। पराली जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। जान-अनजाने अनेक किसान पराली जलाते भी हैं। लेकिन, रोहतक के मदीना गांव निवासी कर्मवीर ऐसे किसान हैं जो पांच साल से पराली न जलाकर दूसरे किसानों के लिए नजीर बन रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पिछले साल किसान ग्रुप भी तैयार किया है, जिसमें आठ किसान सदस्य है जबकि वे ग्रुप के प्रधान है। वे पराली को जलाते नहीं, बल्कि उसको जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

कर्मवीर पिछले पांच वर्षों से पराली को काटकर खेतों में ही डाल देते हैं। 12 एकड़ में खेती करने वाले कर्मवीर का कहना है कि पराली को जैविक खाद के रूप में प्रयोग करने से उनकी चार एकड़ बंजर जमीन में भी अब अच्छी फसल होने लगी है। इस जमीन में अब धान ही फसल लहलहा रही है।

किसान ग्रुप के माध्यम से मिल रह मजबूती

किसान कर्मवीर ने बताया कि उन्होंने गांव में ही किसान ग्रुप भी बनाया हुआ है। वैभव किसान ग्रुप मदीना नाम से बनाए इस ग्रुप के आठ सदस्य हैं। जिनसे उनके कार्यों को और भी मजबूती मिली है। ग्रुप के माध्यम से अन्य किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

किसानों में भी जागरूकता

किसान अतीक का कहना है कि कर्मवीर पिछले करीब पांच सालों से पराली को सदुपयोग कर रहे हैं। वे पराली को जलाने के बजाय उसको जैविक खाद के रूप में प्रयोग करते हैं। उनकी इस तरकीब से किसानों में भी जागरूकता आ रही है।

प्रयोग से हुई पैदावार अच्छी

किसान मनदीप का कहना है कि किसान अब पराली जलाने की बजाय उसका चारे या खाद के रूप में प्रयोग करने लगे हैं। यह उनमें जागरूकता का ही परिणाम है। कर्मवीर ने भी गांव में अच्छा कार्य किया है। उनकी फसल में अच्छी हुई है।

पानी की भी बचत

गांव मदीना के सरपंच कर्म सिंह उर्फ फौजी का कहना है कि कर्मवीर ने पिछले कई सालों से पराली को खाद की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे गांव में अन्य किसानों में भी जागरूकता आ रही है। पराली का इस तरीके से उचित प्रबंधन करने से पर्यावरण संरक्षण भी होता है और पानी की भी बचत होती है।

फसल अवशेष प्रबंधन में बेहतर कार्य

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, रोहतक के उपनिदेशक डॉ, रोहताश का कहना है कि गांव मदीना निवासी किसान कर्मवीर ने फसल अवशेष प्रबंधन में बेहतर कार्य किया है। वे न केवल खुद पराली का खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि अन्य किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं। अन्य किसानों को भी इनसे प्रेरित होकर पराली का उचित प्रबंधन करने की जरूरत है।

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