मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनो में मोलिक्यूलर पैथोलॉजी रिसर्च की खास भूमिका : प्रो. मीनाक्षी

मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनो में मोलिक्यूलर पैथोलॉजी रिसर्च की खास भूमिका : प्रो. मीनाक्षी

जागरण संवाददाता रोहतक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के जेनेटिक्स विभाग की अध्यक्षा प्रो. मी

JagranFri, 26 Feb 2021 06:04 AM (IST)

जागरण संवाददाता, रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के जेनेटिक्स विभाग की अध्यक्षा प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ ने कहा कि मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मोलिक्यूलर पैथोलोजी रिसर्च तथा जेनेटिक्स की खास भूमिका होती है। उन्होंने जेनेटिक्स विभाग की विकास यात्रा पर भी प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संबोधित किया। वे वीरवार को विभाग द्वारा करंट अंडरस्टैंडिग ऑफ पैथोजेनेसिस ऑफ हूमन जेनेटिक डिजीज विषयक एक दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी में स्वागत भाषण दे रही थीं। डीन, लाइफ साइंसेज प्रो. जेपी यादव ने जैव विज्ञान संकाय में गुणवत्तापरक शिक्षण एवं शोध कार्य पर जोर दिया रहा है। समाज के लिए उपयोगी शोध कार्य पर बल देने की बात प्रो. जेपी यादव ने कही। संगोष्ठी में एम्स, नई दिल्ली के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डा. रीमा दादा ने- आक्सिडेटिव स्ट्रेस एंड जेनेटिक फैक्टर इन मेल स्टरिलिटी तथा कांप्लेक्स डिजीज: हाउ टू टैकल दैम विष पर विशेष व्याख्यान दिए। अपने प्रभावशाली संबोधन में प्रो. रीमा दादा ने मानव स्वास्थ्य में शाकाहारी भोजन व योगा की महत्ता को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया। एमएमवीडी यूनिवर्सिटी, जम्मू के बायोटैक्नोलोजी विभाग के डा. राकेश कुमार ने- कैरेक्टराइजेशन ऑफ नॉवल जेनोमिक एलटेरेशन्ज इन कैंसर एमंग इंडियन पॉपुलेशन्स विषय पर व्याख्यान दिया। डा. राकेश ने अल्कोहल, स्ट्रैस, स्मोकिग आदि के स्वास्थ्य पर पडऩे पर दुष्परिणामों बारे बताया। संगोष्ठी में लगभग 19 प्रेजेंटेशन प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई। डा. रीतू यादव ने आभार प्रर्शन किया। डा. एस.के. तिवारी, डा. राजविन्द्र सिंह, डा. नीलम सहरावत, डा. सपना शर्मा, डा. मुकेश तंवर तथा डा. नीलकमल ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। इस संगोष्ठी में 136 प्रतिभागियों ने भाग लिया। एमडीयू में परीक्षाएं छह मार्च से रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) की बीबीए-तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर, बीबीए (सीएएम सेकेंड बीई)-तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर, बीसीए- तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर, बीएचएमसीटी-पांचवें सेमेस्टर, बीएचएम-पांचवें सेमेस्टर, बीजेएमसी- तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर, बीटीटीएम/बीटीएम- तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर, बी. फार्मेसी- प्रथम, तीसरे, पांचवें व सातवें सेमेस्टर की रेगुलर व री-अपीयर तथा दूसरे, चौथे, छठे व आठवें सेमेस्टर की केवल री-अपीयर, एम.फार्मेसी- दूसरे सेमेस्टर री-अपीयर की परीक्षाएं छह मार्च से प्रारंभ होगी। परीक्षा नियंत्रक डा. बीएस सिन्धु ने बताया कि डेटशीट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ग्रंथ अष्टाध्यायी विश्व की अनुपम कृति है : प्रो. मिश्र फोटो संख्या - 7

जागरण संवादाता, रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के संस्कृत विभाग में करियर काउंसलिग एवं प्लेसमेंट सेल के तत्वावधान में पाणिनीय व्याकरण की लोकसिद्धता विषयक विस्तार व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया । महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के एलुमनी(पूर्व छात्र) तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. बृहस्पति मिश्र ने बतौर मुख्य वक्ता इस व्याख्यान कार्यक्रम में शिरकत की। प्रो. बृहस्पति ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में पाणिनीय व्याकरण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका ग्रंथ अष्टाध्यायी विश्व की अनुपम कृति है, जिसकी सभी भारतीय एवं पाश्चात्य भाषा वैज्ञानिक मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। प्रो. बृहस्पति ने कहा कि पाणिनि ने लौकिक व्यवहार का अनुसरण करते हुए अष्टाध्यायी के सूत्रों का निबंधन किया एवं उसी तरह की तकनीकी अपनाई। व्याकरण को इस ²ष्टि से भी समझने की आवश्यकता है, व्याकरण कोई शुष्क विषय नहीं है अपितु हमें रुचिकर ढंग से व्याकरण का अध्ययन करना चाहिए, ऐसा प्रो. बृहस्पति का कहना था। कार्यक्रम के प्रारंभ मं प्राध्यापिका डा. सुनीता सैनी ने स्वागत भाषण देते हुए व्याख्यान के विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डा. रवि प्रभात एवं समन्वयन डा. सुषमा नारा ने किया। करियर काउंसलिग एवं प्लेसमेंट सेल के विभागीय समन्वयक डा. श्रीभगवान ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन की परंपरा का निर्वाह किया। इस अवसर पर विकास, मनीष, सनी समेत सभी विभागीय शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहें।

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