70 फीसद बेटियां बोली पहले आत्मनिर्भर, बाद में बसाएंगे गृहस्थी

70 फीसद बेटियां बोली पहले आत्मनिर्भर, बाद में बसाएंगे गृहस्थी

हरियाणा की बेटियों की सोच अब बदल रही है। वे पहले आत्मनिर्भर बनना और बाद में घर-गृहस्थी बसाने में विश्वास रखती हैं।

Publish Date:Mon, 18 Jan 2021 08:00 AM (IST) Author: Jagran

विनीत तोमर, रोहतक :

हरियाणा की बेटियों की सोच अब बदल रही है। वे पहले आत्मनिर्भर बनना और बाद में घर-गृहस्थी बसाने में विश्वास रखती हैं। बेटियों की इस सोच से प्रदेश में सार्थक बदलाव जाएंगे। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विज्ञान विभाग की सेवानिवृत्त प्रो. एवं परामर्शदाता डा. प्रोमिला बतरा के सर्वे में प्रदेश की 70 फीसद बेटियों ने शादी करने से पहले आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

उन्होंने तीन साल से चल रही काउंसिलिग के दौरान बेटियों को लेकर यह सर्वे किया। 17 से 30 साल की बेटियों पर किए गए सर्वे में सिरसा-फतेहाबाद से लेकर अंबाला-करनाल और रोहतक-झज्जर समेत अन्य जिलों की बेटियों को शामिल किया गया। साथ ही दिल्ली-गुरुग्राम जैसी मैट्रो सिटी से भी कुछ बेटियों को इसमें शामिल किया। कुछ मिलाकर 145 बेटियों पर हुए इस सर्वे में सामने आया कि 101 बेटियां यानी कि 70 फीसद बेटियां ऐसी हैं जो शादी से पहले आत्मनिर्भर होना चाहती है। नौकरी या बिजनेस में सफल होने के बाद वह गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना चाहती है। जबकि 30 फीसद यानी 44 बेटियां ऐसी मिली कि जिनकी सोच है कि पढ़ाई के तुरंत बाद गृहस्थी बस जाए तभी बेहतर है। कुछ ऐसे पूछे गए बेटियों से प्रश्न

- गृहस्थ जीवन को लेकर क्या सोच रखती हैं

- पढ़ाई के बाद करियर बनाना चाहिए या गृहस्थी बसानी चाहिए 70 फीसद बेटियों का मानना

- आत्मनिर्भर होने के बाद ससुराल में अधिक मान-सम्मान मिलता है

- कम दहेज में शादी हो जाती है और दहेज के ताने भी नहीं मिलते

- कामकाजी होने के कारण पति भी अधिक इज्जत करते हैं

- खुद या घर के खर्च के लिए ससुरालियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता

करीब 30 फीसद बेटियों की यह सोच

- नौकरी और गृहस्थी में तालमेल नहीं बैठता, जो झगड़े का कारण बनता है

- सुबह जल्दी जाना और फिर आकर भी काम करना, ऐसे में खुद के लिए समय नहीं मिलता

- नौकरीपेशा होने के कारण बच्चे होने के बाद स्थिति और भी खराब हो जाती है

- पढ़ाई के बाद घर गृहस्थी बसाना ही बेहतर रहता है - फतेहाबाद की रहने एमए की छात्रा पूजा (काल्पनिक नाम) का कहना है कि बहुत हो गया, अब किसी पर निर्भर नहीं रहना। यदि हम आत्मनिर्भर होंगे तभी ससुराल में मान-सम्मान मिलता है, नहीं तो कोई भी दहेज के लिए ताने मार देता है।

- अंबाला निवासी बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा ज्योति (काल्पनिक नाम) का मानना है कि हम भी लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकते हैं। हम क्यों किसी से पीछे रहे। नौकरी करेंगे तो ना मायके पर निर्भर होना पड़ेगा और ना ही ससुराल पर। अपनी मर्जी से बेहतर जिदगी जी सकते हैं।

- गुरुग्राम की रहने वाली दिव्या (काल्पनिक नाम) टेलीकॉम कंपनी में काम करती है। दिव्या का मानना है कि वह शादी तभी करेगी जब अच्छे पद पर पहुंच जाएगी। अब बदलाव का समय आ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों की भी सोच बदल रही है। बेटियां भी हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रही है। माता-पिता को भी समझना होगा कि गृहस्थ जीवन जरूरी है, लेकिन उससे पहले अगर बेटियां आत्मनिर्भर बन जाए तो बेहतर है। इस सर्वे में खास यह रहा कि प्रोफेशनल कालेज में पढ़ने वाली बेटियों से बात की गई तो उनके ऊपर समय से पहले शादी को लेकर कोई दबाव नहीं मिला।

- प्रो. प्रोमिला बतरा, रिटायर्ड प्रोफेसर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय

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