जोगिया द्वारे-द्वारे: महेश कुमार वैद्य

जोगिया द्वारे-द्वारे: महेश कुमार वैद्य
Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 03:01 PM (IST) Author: Jagran

बन गया सत्ता का नया पावर सेंटर समय सदा एक जैसा नहीं रहता। विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह से विवाद के बाद मान लिया गया था कि अरविद यादव को लंबे समय तक अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। राव की शिकायत पर उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया था। अरविद की प्रादेशिक नेतृत्व पर पकड़ को देखते हुए इसे अप्रत्याशित माना गया। अरविद पदमुक्त करने का पत्र मीडिया से मांगते रहे, मगर हालात विपरीत थे। भाजपा ने अरविद को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठकों में बुलाना बंद कर दिया। इससे राव के सबसे पावरफुल होने का संदेश गया, मगर अरविद यादव को हरको बैंक का चेयरमैन बनाकर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि पार्टी कैडर से जुड़े नेताओं को फ्रंटफुट पर बैटिग का मौका देगी। बेशक अरविद, राव जितने ताकतवर नहीं है, मगर इस नियुक्ति से राव विरोधियों को सत्ता का नया पावर सेंटर मिल गया है।

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ताकत के इंतजार में हैं दुबले नेता नांगल चौधरी के विधायक डा. अभय सिंह यादव की कदकाठी बेशक दुबली-पतली है, मगर मौका मिले तो मैदान के बीच उतरकर ताकत दिखाने के लिए तैयार हैं। चाहत है मंत्री बनकर पूरे अहीरवाल में काम की छाप छोड़ने की, मगर मन की चाही सबकी पूरी नहीं होती है। जब-जब मंत्रिमंडल विस्तार की बात चलती है तब-तब अभय सिंह समर्थकों को लगता है कि उनकी भी लाटरी खुल सकती है। पिछले दिनों जब मंत्री ओमप्रकाश यादव का एसपी से विवाद हुआ और उनकी आडियो वायरल हुआ तो अभय सिंह के कुछ समर्थक उत्साहित हुए थे, मगर डा. अभय सिंह चुप रहे। अब कुछ दिन से फिर मंत्रिमंडल में बदलाव-विस्तार की बात चल रही है तो नांगल चौधरी में भी हलचल है, मगर आइएएस अधिकारी रह चुके अभय सिंह जानते हैं कि जब तक दिल्ली के आका ओमप्रकाश यादव पर मेहरबान हैं, तब तक वही इस इलाके के ताकतवर पहलवान हैं।

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सुनील के कंधे से चलती है बंदूक कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना। यह पुरानी कहावत है। हरको बैंक का चेयरमैन बनने के बाद अरविद यादव को घेरने के मामले में यह बात पूरी तरह सही साबित हो रही है। अपने कद को ध्यान में रखते हुए राव इंद्रजीत सिंह, विरोधी को मिले चेयरमैन पद पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, मगर उनके खास सिपहसालार सुनील मुसेपुर अरविद पर जमकर तीर चला रहे हैं। माना जा रहा है कि सुनील के कंधों पर रखी बंदूक से गोलियां राव के इशारे पर ही निकल रही हैं। बिना राव यह संभव ही नहीं है कि सुनील की जुबान से कुछ तीर निकलें। वैसे राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी तो यह कह रहे हैं कि सुनील की बयानबाजी से अरविद का राजनीतिक कद छह इंच छोटा होने की बजाय बढ़ रहा है। जानकारों की मानें तो कद और पद तो समय के फेर और भाग्य से मिलते हैं।

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दाढ़ी वाले नेताजी की खुशी का राज

दाढ़ी वाले नेताजी (राव दान सिंह) के चेहरे पर चमक लगातार बढ़ रही है। हालांकि घनी दाढ़ी में यह चमक कमजोर आंखों वालों को दिखाई नहीं देती, मगर बातचीत का अंदाज बता देता है कि वह भविष्य में अच्छे दिनों की पूरी उम्मीद कर रहे हैं। राव इंद्रजीत विरोधियों की सूची यूं तो काफी लंबी है, मगर गुरुग्राम से लेकर नांगल चौधरी तक राव दान सिंह का नाम भी उन नेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने राव इंद्रजीत से पंगा लेकर भी सत्ता सुख हासिल किया है। दान सिंह उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जिन्हें भूपेंद्र सिंह हुड्डा की गुडबुक में खास स्थान मिला हुआ है। बरोदा उपचुनाव से दान सिंह जैसे नेताओं को मौजूदा सत्ता के बदलाव की बेशक उम्मीद नहीं है, मगर आने वाले समय में अपने नेता व उनकी पार्टी के ताकतवर बनकर उभरने की उम्मीद पूरी है। दाढ़ी वाले नेताजी की खुशी का राज यही है।

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