यमुनानगर में डीसी के आदेश भी बेमानी, प्लाईवुड फैक्ट्रियों में बिना एनओसी बनाए जा रहे लेबर के क्वार्टर

यमुनानगर में डीसी के आदेशों को ताक पर रखकर क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। रिहायशी क्वार्टर बनाने के लिए दमकल विभाग से एनओसी लेनी जरूरी होती है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बिना एनओसी लिए ही लेबर के लिए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं।

Rajesh KumarSun, 28 Nov 2021 10:51 AM (IST)
यमुनानगर में बिना एनओसी बनाए जा रहे लेबर के लिए क्वार्टर।

जागरण संवाददाता, यमुनानगर। सिटी सेंटर रोड पर कबाड़ के गोदाम में लगी आग ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीसी ने भी दौरा कर ऐसे सभी प्रतिष्ठानों व जगहों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। घटना के चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सर्वे शुरू भी नहीं हुआ। वहीं नियम की बात करें, तो रिहायशी क्वार्टर बनाने के लिए दमकल विभाग से एनओसी लेनी जरूरी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बिना एनओसी लिए ही लेबर के लिए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। ऐसी प्लाईवुड इकाइयों की संख्या भी कम नहीं है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर क्वार्टर बनाए हुए हैं। ये क्वार्टर कई-कई मंजिले हैं। एक क्वार्टर में कई-कई लोग रहते हैं। प्रशासन की लापरवाही की वजह से लेबर की जान जोखिम में है।

25 नवंबर की तड़क में सिटी सेंटर रोड पर कबाड़ के गोदाम में आग लग गई थी। गोदाम के ऊपर लेबर के लिए क्वार्टर बनाए गए थे। सस्ते किराये के लालच में लेबर यहां पर परिवार सहित रहती है। यह केवल एक जगह की बात नहीं है। यमुनानगर में मेटल व प्लाईवुड का बड़ा कारोबार है। यहां पर बिहार व उत्तर प्रदेश से काफी संख्या में आकर लेबर रहती है। कुछ लेबर के लिए प्लाईवुड फैक्ट्रियों के पास ही क्वार्टर बनाए गए हैं। यहां पर सभी नियम ताक पर रखे गए हैं। सबसे बड़ी समस्या यहां पर सुरक्षा की है। कही पर यदि कोई आगजनी या कुछ अन्य हो जाए, तो यहां पर लेबर की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध तक नहीं होते। 

कई-कई मंजिला क्वार्टर 

क्वार्टर के नाम पर छोटा सा कमरा लेबर के लिए बनाया जाता है। इसका किराया भी एक से डेढ़ हजार रुपये प्रति माह तक होता है। एक क्वार्टर में चार से पांच मजदूर तक रहते हैं, ताकि उन्हें कम किराया देना पड़े। जगाधरी, दामला, पांसरा, ताजकपुर, बाड़ीमाजरा, पुराना सहारनपुर रोड, शादीपुर में ऐसे काफी क्वार्टर लोगों ने बनाए हुए हैं। कुछ क्वार्टर ऐसे हैं, जहां पर बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। वहां पर चोरी से तार डालकर बल्ब जलाया जाता है। इसके बावजूद इस पर किसी का ध्यान नहीं है। 

कई वारदात तक हो चुकी इन क्वार्टरों में

लेबर के लिए बनाए गए क्वार्टर दूर जंगलों में है। ऐसे में वारदात होने का भी खतरा रहता है। पहले भी कई वारदात लेबर के साथ हो चुकी है, क्योंकि दूर होने की वजह से पुलिस भी उस ओर गश्त नहीं करती। करीब दो साल पहले ऐसे ही क्वार्टरों से मोबाइल चोरी के शक में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। एक क्वार्टर में शराब पीते समय आपस में मजदूरों का विवाद हो गया था। जिसमें एक की हत्या कर दी गई थी। इस तरह की काफी वारदात इन क्वार्टरों में हो चुकी है।

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