World Blood Donor Day: मिलिये जींद के रक्तदानी परिवार से, छोटे बेटे की पहल पर पूरा परिवार जानें बचाने में जुटा

आज विश्व रक्तदाता दिवस है। जींद के रूपगढ़ गांव के संजय और बिजेंद्र अहलावत का पूरा परिवार रक्तदानी है। संजय 33 साल की उम्र में 32 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनसे प्रेरित होकर बड़े भाई बिजेंद्र भाभी और पत्नी रक्तदान मुहिम में जुड़ गए।

Umesh KdhyaniMon, 14 Jun 2021 05:46 PM (IST)
एडवोकेट संजय अहलावत ने परिवार में सबसे पहले 21 वर्ष की उम्र में रक्तदान की शुरुआत की थी

जींद [कर्मपाल गिल]। रक्तदान महादान। इस नारे को सार्थक कर रहा है जींद के गांव रूपगढ़ के दो भाइयों का परिवार। इस परिवार के चार सदस्य रक्तदानी बने हुए हैं। कहीं भी रक्त की जरूरत होती है, तो तुरंत पहुंच जाते हैं। अब गांव में भी लोग इन्हें रक्तदानी कहने लगे हैं।

परिवार में सबसे पहले रक्तदान की शुरुआत की थी एडवोकेट संजय अहलावत ने। पहली बार 21 साल की उम्र में वर्ष 2008 में रक्तदान किया था। तब घर में बताया तो माता-पिता ने काफी डांटा और कहा कि शरीर में कमजोरी आ जाएगी। लेकिन संजय के कदम रुके नहीं। तीन महीने के बाद जब भी कहीं कैंप लगता तो रक्तदान कर आते। एक-दो साल तक घर वाले कहते रहे कि हम घी-दूध खिलाते हैं और तू सारा खून निकलवा आता है। मोटा नहीं होगा। बीमारी जकड़ लेगी। संजय बताते हैं कि उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को रक्तदान के फायदे बताए और कहा कि इससे शरीर में नया खून बनता है। कोई बीमारी नहीं आती। इसके बाद परिवार में किसी ने कुछ नहीं कहा।

छह साल पहले बड़े भाई भी आए साथ

जेसीई जींद ब्रदर्स के पूर्व प्रधान संजय बताते हैं कि छह-सात बार रक्तदान करने के बाद उन्होंने इसे रेगुलर मिशन बना लिया। अब तक 33 साल की उम्र में 32 बार रक्तदान कर चुके हैं। छह साल पहले उनसे प्रेरित होकर बड़े भाई बिजेंद्र ने पहली बार रक्तदान किया। उन्होंने भी इसे मिशन बना लिया और अब तक 14 बार रक्तदान कर चुके हैं। दोनों भाइयों के बाद उनकी पत्नी भी पीछे नहीं रही। बिजेंद्र की पत्नी मीना अब तक 7 बार और संजय की पत्नी रीना एमपीएचडब्ल्यू 4 बार रक्तदान कर चुकी हैं। संजय बताते हैं कि उनके प्रेरणास्रोत गांव के सामाजिक कार्यकर्ता स्व. जगदीश शर्मा और सुभाष ढिगाना हैं।

गांव में बनाए रक्तदानी जोड़े

रक्तवीर संजय अहलावत बताते हैं कि वह अब तक 13 रक्तदान कैंप लगा चुके हैं और 700 लाेगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। पहली बार गांव में रक्तदान कैंप लगाया था। अब तक गांव में 7 रक्तदान कैंप लगा चुके हैं और अब तो लोग लाइनों में लगते हैं। वर्ष 2014-15 में गांव में रक्तदान कैंप लगाया और शर्त रखी कि सिर्फ जोड़े का ही रक्त लिया जाएगा यानि पति-पत्नी, भाई-भाई या भाई बहन। उस दिन गांव में 27 जोड़े बन गए थे। इन जोड़ों के सभी सदस्य लगातार रक्तदान कर रहे हैं। संजय बताते हैं कि कोरोना काल में उन्होंने नागरिक अस्पताल में 18 मई से रक्तदान कैंप शुरू किया था, जो पांच जून तक चला। इस तरह 76 लोगों का रक्तदान करवाया।

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