दर्दनाक, गर्भपात के आरोप की जांच पर जांच, लेकिन महिला को इंसाफ नहीं

दर्दनाक, गर्भपात के आरोप की जांच पर जांच, लेकिन महिला को इंसाफ नहीं
Publish Date:Sat, 08 Aug 2020 05:50 PM (IST) Author: Anurag Shukla

पानीपत, जेएनएन। जिला अदालतों में केसों का लंबित रहने का पीरियड कम होता जा रहा है, सरकारी विभागों में जांच का समय बढ़ रहा है। ईएसआइ अस्पताल की डाक्टर पर एक महिला ने गर्भपात करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जनवरी 2017 में पहली शिकायत दी थी। हैरत है कि शिकायकर्ता को बयान देने के लिए अनेकों बार बुलाया जा चुका है, जांच है कि फाइनल रिपोर्ट तक नहीं पहुंच रही है।

तहसील कैंप निवासी सुनील ने बताया कि शादी के बाद पत्नी निशा नवंबर-2016 में मानसिक रूप से बीमार हो गई थी। इलाज के लिए वह ईएसआइ अस्पताल में ले गया था। मनोरोग विशेषज्ञ महिला डाक्‍टर ने पत्नी का चेकअप किया तो  वह दो माह की गर्भवती थी। गर्भ में पल रहे बच्चे की दिल में धड़कन बहुत कम थी। महिला डाक्‍टर ने कहा गर्भपात नहीं कराया तो पत्नी की जान जा सकती है। पांच नवंबर 2016 को मनोरोग विशेषज्ञ ने गर्भपात कर दिया। गर्भपात होने के बाद पत्नी के पेट में दर्द रहने लगा। 

डाक्‍टर ने महिला को  7वें दिन रोहतक पीजीआइ में रेफर कर दिया था। वहां चिकित्सकों ने दर्द का कारण गर्भाष्य फटना बताया था।पत्नी का वहां दोबारा ऑपरेशन किया था। आरोप है कि तब से अब तक छह-सात बार जांच टीम फरीदाबाद से आ चुकी है। हर बार नई टीम आती है, पुराने सवालों को दोहरा कर लौट जाती है। छह अगस्त को भी टीम बयान लेकर लौट गई, निर्णय पर नहीं पहुंची।

फरीदाबाद टीम कर रही जांच 

चिकित्सा अधीक्षक डा. शिवकुमार का कहना है कि इस केस की जांच फरीदाबाद टीम कर रही है। छह अगस्त को भी पांच सदस्यीय टीम आई थी। दोनों पक्षों से बात करते गई है। पीड़ित पक्ष को बयानों की काॅपी भी दी गई। शिकायत कई जगह दी गई है, इसलिए भी जांच में देरी हो रही है।

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