Weather Update: हरियाणा में आफत की बरसात, कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी में बाढ़ के हालात, 20 गांवों में बढ़ा खतरा

हरियाणा में भारी बारिश के कारण मारकंडा नदी में एक साथ पानी बढ़ गया है। इसमें करीब 12 हजार क्यूसिक पानी है। एक साथ पानी आने से इसके आसपास के 20 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई गांवों में तो पानी पहुंच गया है।

Rajesh KumarFri, 24 Sep 2021 07:05 AM (IST)
हरियाणा में भारी बारिश मारकंडा नदी में बाढ़ जैसे हालात।

इस्माईलाबाद(कुरुक्षेत्र), संवाद सहयोगी। आश्विन मास में पहाड़ों और मैदानी इलाके में तेज बारिश आफत बन गई है। मारकंडा नदी में एक साथ पानी बढ़ गया है। इसमें करीब 12 हजार क्यूसिक पानी है। एक साथ पानी आने से इसके आसपास के 20 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई गांवों में तो पानी पहुंच गया है। नदी के कच्चे किनारे कभी भी बड़ी कारण बन सकते हैं। हालांकि सिंचाई विभाग ने मारकंडा में झांसा के नजदीक छह हजार क्यूसिक पानी होने की बात कही है। इधर सुबह व शाम को तेज बारिश शहर के लिए परेशानी पैदा करने वाली रही। दुखभंजन कालोनी सहित कई कालोनियों में घरों में पानी घुस। नगर परिषद के पानी निकासी के दावे एक बार फिर हवा हो गए।

मारकंडा नदी में बाढ़ जैसे हालात

मारकंडा नदी में पिछले कई दिन से पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। वीरवार दोपहर को तीन घंटे लगातार बरसात चली। तेज बरसात के बाद तो प्रशासन के पांव तक हिल गए। नदी में बढ़ते पानी के दबाव को लेकर जलबेहड़ा में बने नियंत्रण कक्ष को तुरंत हरकत में लाया गया। यहां से हिमाचल के काला अंब से आने वाली पानी की हर घंटे की रिपोर्ट ली। बताया जा रहा है कि पहाड़ी एरिया से पानी अभी आना जारी रहेगा। गांव झांसा से पहले के नदी के पानी ने कई गांवों में दस्तक दे दी। तंगौर, तंगौरी, कठुवा के एरिया में लोगों ने एहतियात बरतनी शुरू कर दी है। आसपास के खेत नदी के पानी से लबालब हो चुके हैं। नदी का पानी झांसा में मारकंडा नदी के पुराने पुल को छूकर गुजर रहा है। पानी के दबाव को कम करने के लिए सिंचाई विभाग ने गांव झांसा के पास एसवाइएल के किनारे बने साइफनों के द्वार खोल दिए हैं। यहां से पानी नहर में डाला जा रहा है, ताकि आगे के गांवों का खतरा कम किया जा सके।

गांव जलबेहड़ा व नैसी के पास कच्चे किनारों के ऊपरी भाग को छू रहा

गांव जलबेहड़ा और नैसी के पास नदी का पानी कच्चे किनारों के ऊपरी भाग को छू कर गुजर रहा है। गांव नैसी के पास कच्चे किनारे खेतों से पांच फुट ऊंचे हैं। यहीं से नदी पिछले दो दशक में कई बार कहर बरपा चुकी है। गांव नैसी के सरपंच वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वे नदी पर गांव के लोगों के साथ डेरा डाले हुए हैं। इसके साथ ही गांव वालों ने सिमेंट के खाली कट्टों में मिट्टी भर कर रख ली है ताकि कहीं भी आवश्यकता पड़ने पर पानी से किनारों के कटाव को बचाया जा सके।

कई गांवो में अलर्ट जारी 

इस्माईलाबाद थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से नदी आसपास के गांव टबरा, मडाडों, जैतपुरा, जोधपुर, बालापुर, कलावड़, जंधेड़ी के लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। प्रशासन बार-बार नदी का जायजा लेने में जुटा रहा। लगातार नियंत्रण कक्ष से संपर्क बनाए हुए हैं। नियंत्रण कक्ष को निर्देश दिए गए हैं जैसे ही जलस्तर और बढ़ता है इसकी सूचना प्रशासन को दें।

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