Dengue : डेंगू बुखार है तो आजमाएं ये घरेलू नुस्‍खे, जानिए क्‍या कहते हैं आयुर्वेदिक चिकित्‍सक

Dengue Alert डेंगू बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बुखार के असर को कम करने के लिए घरेलू नुस्‍खे भी काम आ सकते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्‍सक की मानें तो डेंगू से बचाव के लिए एहतियात बरतें। पपीते के पत्तों का काढ़ा भी कारगर है।

Anurag ShuklaSat, 23 Oct 2021 09:59 AM (IST)
डेंगू बुखार में कुछ घरेलू नुस्‍खे काम के।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। कोरोना के बाद अब डेंगू खूब डरा रहा है। डेंगू बुखार के बाद लोग सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सक विशेष रूप से एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषतौर पर मच्छरों से बचाव की सलाह दी जा रही है। दूसरा, एलाेपेथिक चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा को भी काफी कारगर बताया जा रहा है। डेंगू से बचाव व विभाग की ओर से दी जा रही अन्य सेवाओं को लेकर दैनिक जागरण संवाददाता संजीव कांबोज ने नव नियुक्त जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. विनोद पूंडीर से बातचीत की। बातचीत के अंश इस प्रकार हैं :-

सवाल : इन दिनों डेंगू बुखार का प्रकोप काफी देखा जा रहा है। बचाव के लिए किस तरह की एहतियात बरती जानी चाहिए।

जवाब : देखिए, डेंगू से बचाव के लिए सबसे पहले हम मच्छरों से बचाव रखना होगा। अपने अासपास पानी न जमा होने दें। कूलर, छतों पर पड़े खाली बर्तन व गमलों को नियमित रूप से साफ करते रहें। आसपास यदि कहीं पानी जमा है तो उसमें दवाई डाल दें। ताकि मच्छर का लारवा न पनप सके। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान में सहयोग दें।

सवाल : बचाव के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति कितनी कारगर है।

जवाब : कोरोना काल में आयुष विभाग की ओर से वितरित किया गया काढ़े के सकारात्मक परिणाम सामने आए। बुखार से बचाव के लिए गिलोय की बेल के काढ़े का सेवन करें। आयुष 64 के नाम से दवाई आती है। यह भी काफी कारगर है। प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में पपीते के पत्तों को काढ़ा तैयार कर पिएं। काफी लाभ मिलेगा। लक्षण दिखाई देने पर सबसे पहले टेस्ट जरूर करवाएं। उपचार को लेकर किसी तरह की कोताही न बरतें।

सवाल : आयुष विभाग की ओर से चल रही डिस्पेंसरियों पर दवाइयों की उपलब्धता की क्या स्थिति है?

जवाब : विभाग की ओर से 18 आयुर्वेदिक, तीन युनानी डिस्पेंसरियां चलाई जा रही हैं। 10 डिस्पेंसरियों को आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में तब्दील कर दिया गया है यहां आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। किसी भी डिस्पेंसरी पर दवाइयों की कमी नहीं है। हर तरह की बीमारी का उपचार बेहतरी से किया जा रहा है।

सवाल : आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की ओर से लोगों को कितना रुझान है।

जवाब : छह- सात वर्ष से आयुर्वेदिक चिकित्सा की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। क्योंकि डिस्पेंसरियों पर दवाइयों की कमी नहीं रही। चार-पांच गुण ओपीडी बढ़ी है। विभाग की ओर से शुगर से बचाव के लिए आशा व एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया है ताकि ये ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के बारे में जागरूक कर सकें। उनको बचाव के उपाय बता सकें। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

सवाल : भविष्य में किस तरह आधुनिक सुविधाएं दिए जाने की योजना है?

जवाब : विभाग की ओर से जैसे निर्देश होंगे, वैसी ही सुविधाएं जिलावासियों को मिलेंगी। बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया करवाने के उद्देश्य ही डिस्पेंसरियों को आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। इसके अलावा कई डिस्पेंसरियों को जल्दी नए भवन मिलने की उम्मीद है। इसकी प्रक्रिया चल रही है।

सवाल : बतौर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी आपकी प्राथकमिकता क्या रहेगी?

जवाब : प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर बेहतर चिकित्सीय सेवाएं मुहैया करवाई जाएंगी। कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए अधिक से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिले। लोगों का आयुर्वेद की ओर रुझान बढ़े। जिलावासियों से अपील है कि मौसम के बदलते इस दौर में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। संतुलित आहार लें अौर खानपान का विशेष रूप से ख्याल रखें। तुलसी-अदरक, शहद का सेवन करें।

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