बेमौसमी बारिश का गन्ने की फसल में भी नुकसान, चीनी उत्पादन पर पड़ेगा असर

हरियाणा में सितंबर में बारिश की वजह से गेहूं धान के अलावा गन्‍ने की फसल पर भी असर पड़ा है। गन्‍ने की गुणवत्‍ता प्रभावित हुई है। ऐसे में चीनी उत्‍पादन पर भी असर पड़ सकता है। पिछले साल चीनी रिकवरी का 10.50 प्रतिशत था टारगेट अबकी बार घटाया।

Anurag ShuklaTue, 30 Nov 2021 05:51 PM (IST)
गन्‍ने की फसल प्रभावित होने से चीनी उत्‍पादन पर असर।

जींद, जागरण संवाददाता। इस साल सितंबर में हुई बेमौसमी तेज बारिश की वजह से गेहूं, धान, कपास की फसल में काफी नुकसान हुआ है। स्पेशल गिरदावरी के अनुसार जिले में करीब 68 हजार एकड़ फसल में नुकसान हुआ है। वहीं गन्ने की फसल में भी बेमौसमी बारिश का नुकसान है, जिसके चलते गन्ने की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। बेमौसमी बारिश की वजह से ही गन्ने की फसल में पड़ने वाले असर और पिछले साल कम रही रिकवरी के कारण शुगर मिल प्रबंधन ने भी गन्ने से चीनी रिकवरी का टारगेट पिछले साल से घटाकर 10 प्रतिशत किया है। पिछले साल जहां प्रति क्विंटल चीनी का उत्पादन 10.50 किलो का रखा गया था।

वहीं इस बार प्रति क्विंटल चीनी रिकवरी 10 किलो का टारगेट रखा गया है। प्रति क्विंटल होने वाले चीनी उत्पादन के अनुसार रिकवरी रेट तय होता है। प्रति क्विंटल गन्ने से इस बार 10 किलो चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है। जींद शुगर मिल के अधीन जींद, हिसार, फतेहाबाद जिले के करीब 2600 किसानों ने गन्ने की खेती की है और लगभग 17150 एकड़ में गन्ने की फसल है। पिछले साल से गन्ने का रकबा ज्यादा है। जिसके चलते इस बार भी शुगर मिल में पेराई सत्र जल्दी शुरू हुआ। 11 नवंबर को सहकारिता मंत्री डा. बनवारी लाल ने आनलाइन पेराई सत्र का उद्घाटन किया था। अभी तक करीब तीन लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की जा चुकी है।

3.20 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का लक्ष्य

इस सीजन के लिए 39 लाख क्विंटल गन्ने की बांडिंग हुई है। 10 प्रतिशत चीनी रिकवरी का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 30.14 लाख क्विंटल गन्ने की पेराइ कर 294950 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया था। इस सीजन में 32 लाख क्विंटल गन्ने की पेराइ कर लगभग 3.20 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

पिछले साल भी कम रही थी रिकवरी

शुगर मिल एमडी प्रवीन कुमार ने बताया कि पिछले साल ज्यादातर शुगर मिल में गन्ने की रिकवरी कम रही थी। वहीं इस बार सितंबर में देरी से हुई बारिश की वजह से भी गन्ने की फसल पर असर पड़ा है। इन दोनों कारणों से गन्ने की रिकवरी का टारगेट पिछले साल की तुलना में कम रखा गया है। पेराइ सत्र सुचारू रूप से चल रहा है।

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