चार साल में फरवरी का सबसे गर्म दिन रहा मंगलवार, दिन के तापमान में उछाल की संभावना

अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है।

पिछले 10 साल के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 21 फरवरी 2017 को सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया था। इस दिन दिन का तापमान बढ़कर 29.0 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। फरवरी के अंत तक दिन के तापमान में और उछाल की संभावना है।

Umesh KdhyaniTue, 23 Feb 2021 06:46 PM (IST)

करनाल, जेएनएन। मौसम में गर्माहट आ गई है। फरवरी माह में मंगलवार का दिन चार साल में सबसे अधिक गर्म दर्ज किया गया है। अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस  दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री सेल्सियस  दर्ज किया गया। यह भी सामान्य से 1.0 डिग्री अधिक है। सुबह के समय नमी की मात्रा 100 फीसदी दर्ज की गई जो शाम को घटकर 65 फीसदी रह गई। हवा 2.5 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मुताबिक आने वाले 24 घंटे में मौसम साफ व शुष्क बना रहेगा, दिन के तापमान में ओर अधिक उछाल आ सकता है। 

फरवरी माह में किस वर्ष कितना दर्ज किया गया अधिकतम तापमान

वर्ष                               अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस)

2018                               27.4

2019                               25.8

2020                               25.0

2021                               27.6

नोट : यह आंकड़े मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए हैं।

पिछले 10 वर्षों में 21 फरवरी 2017 को दर्ज किया गया था सबसे गर्म दिन

मौसम विभाग के पिछले 10 साल के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 21 फरवरी 2017 को सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया था। इस दिन दिन का तापमान बढ़कर 29.0 डिग्री सेल्सियस  पर पहुंच गया था। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि फरवरी माह के अंत तक दिन के तापमान में और अधिक उछाल होने की संभावना है, ऐसे में जाहिर है कि तापमान कई रिकार्ड तोड़ सकता है। 

अचानक बढ़ी गर्मी ने बढ़ाई परेशानी

मौसम में अचानक बढ़ी गर्मी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को मौसम का नजारा ऐसा देखने को मिला जैसे सर्दी ही खत्म हो चुकी है। हालांकि कृषि की दृष्टि से यह मौसम ठीक नहीं है। अभी वातावरण में ठंड बनी रहनी जरूरी है। यदि तापमान यहीं पर स्टैंड कर जाता है तो उसका नुकसान गेहूं की फसल पर हो सकता है। फसल जल्दी मैच्योर हो जाएगी, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। 

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