कोरोना ने अस्त किया पानीपत का सूरज, सनातन धर्म संगठन के पूर्व प्रधान सूरज पहलवान का निधन

सूरज पहलवान पानीपत के जाने-माने चेहरे थे। उनका आज अंतिम संस्कार होगा।

पानीपत में कोरोना का कहर जारी है। लगातार दूसरे दिन दूसरा झटका पानीपत शहर को लगा है। सनातन धर्म संगठन से पूर्व प्रधान सूरज पहलवान की कोरोना के चलते मौत हो गई है। एक दिन पहले हरियाणा व्यापार मंडल के चेयरमैन रोशनलाल गुप्ता की मौत हुई थी।

Umesh KdhyaniSun, 18 Apr 2021 08:53 AM (IST)

पानीपत, जेएनएन। कोरोना की दूसरी लहर शहर पर कहर बनकर टूटी है। एक दिन पहले हरियाणा व्यापार मंडल के चेयरमैन रोशनलाल गुप्ता की कोरोना संक्रमण के कारण जान गई तो दूसरे ही दिन सनातन धर्म संगठन के पूर्व प्रधान सूरज पहलवान ने दम तोड़ दिया। उनका गुरुग्राम के पारस अस्पताल में इलाल चल रहा था। कोरोना को नहीं हरा सके। शहर में जैसे ही उनके निधन की खबर आई, हर कोई गमगीन हो गया। सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के अलावा विधायक प्रमोद विज ने भी इंटरनेट मीडिया पर शोक जताया। रविवार को दिन के 11 बजे असंध रोड पर दो नहरों के बीच श्मशान घाट में अंतिम संस्कार होगा।

वार्ड 11 में जन्मे सूरज सूरज मोहिंद्रु को पहलवानी का शौक था। वह देवी मंदिर के अखाड़े में कुश्ती करने आते। पहलवानी करने के कारण उनके नाम के आगे पहलवान भी लग गया। उन्होंने हरियाणा केसरी का खिताब भी जीता था। सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े सूरज पहलवान को लोग इतना पसंद करते थे कि वह लगातार 11 साल तक सनातन धर्म संगठन के प्रधान रहे। इस संगठन से शहर की सभी धार्मिक संस्थाएं जुड़ी हैं। इन संस्थाओं के प्रधान ही सनातन धर्म संगठन का प्रधान चुनते थे। पिछले वर्ष उन्होंने अस्वस्थ होने का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इन्कार किया तो नया प्रधान चुना गया।

सुबह से शाम तक राशन बांटते थे

उनके सहयोगी एवं सनातन धर्म संगठन के चेयरमैन सुभाष गुलाटी ने बताया कि पिछले वर्ष जब लाकडाउन लगा था, तब वह और सूरज पहलवान, दोनों सुबह से शाम चार बजे तक एक हजार लोगों तक खाना पहुंचाते थे। वार्ड 11 में रहते थे। कुटानी रोड पर जहां उनकी फैक्ट्री है, वो जगह पहलवान चौक के नाम से मशहूर हो गई है। उनके बेटे कपिल और राहुल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का काम करते हैं। सूरज पहलवान ने नगर परिषद का चुनाव भी लड़ा था और सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी।

कहते थे, राशन बांटने मलिन बस्ती में चलो

सुभाष गुलाटी ने बताया कि जब राशन बांट रहे थे, तब वे कहते थे कि शहर से बाहर मलिन बस्ती में कोई नहीं पहुंच रहा। वहां हमें राशन देना चाहिए। तब सूरज आगे होते और घर-घर जाकर खाना पहुंचाते। कहकर भी आते, कोई दिक्कत हो तो फोन करना। शहर छोड़कर मत जाना। किसी को भूखा नहीं सोने देंगे। पिछले वर्ष दस मई को उनके हार्ट की सर्जरी हुई थी। तब से वह ठीक थे। पर पिछले दिनों हार्ट में दिक्कत हो गई। खून की भी कमी हो गई। इस बीच, कोरोना ने जकड़ लिया। एक दिन पहले प्लाजा थैरेपी भी हुई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

शहर के लिए बड़ी क्षति है

हरियाणा स्वतंत्रता सैनिक सम्मान समिति की पूर्व सदस्य एवं शहीद क्रांतिकुमार शर्मा की बेटी उर्वशी शर्मा ने सूरज पहलवान के निधन को पानीपत के लिए बड़ी क्षति बताया है। नार्दर्न रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं शिवसेना के पूर्व जिला अध्यक्ष विजयंत शर्मा कहा कि उन्होंने अपना निकटतम सहयोगी खो दिया।

 कुटानी रोड पर गरीब बच्चों को पढ़ाते थे

अवध धाम मंदिर के संस्थापक दाऊजी महाराज ने बताया कि सूरज पहलवान मंदिर के संरक्षक भी थे। उनकी प्रेरणा से सूरज पहलवान ने गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाने के लिए कार्यक्रम किया। राधे राधे महाराज ने बताया कि कुटानी रोड पर निर्वाण कुटिया में गरीब बच्चों को विद्यालय चलता है, जिसका खर्च सूरज पहलवान उठाते थे। सहयोगियों से भी चंदा एकत्र करते थे। श्मशान के पीछे जमीन थी, जहां पर इन्होंने स्कूल बनवाया।

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