Social boycott: जींद में अनुसूचित जाति के लोगों का बहिष्कार, तनाव के चलते इस मोहल्ले की गलियों में पसरा सन्नाटा

जींद के गांव में तनाव के चलते अनुसूचित जाति के लोगों के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। सभी लोगों ने उनके सामने आने वाली दिक्कतों के बताना शुरू कर दिया और स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा उन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।

Naveen DalalThu, 14 Oct 2021 08:03 PM (IST)
गांव में तनाव के चलते अनुसूचित जाति के लोगों के चेहरे पर डर

जींद, जागरण संवाददाता। जींद के गांव छातर में दो समुदाय के लोगों में तनाव बनने के बाद अनुसूचित जाति की कालोनियों में सन्नाटा पसरा रहता है। गांव के एक हिस्से में स्थिति सामान्य थी और जगह-जगह लोग बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाते हुए नजर आए। जब अनुसूचित जाति के लोगों के सामाजिक बहिष्कार के बारे में पूछा तो बुजुर्गों ने कहा कि किसी का कोई सामाजिक बहिष्कार नहीं है और 36 बिरादरी का भाईचारा है।

गलियों में पसरा पड़ा है सन्नाटा

अगर कुछ लोग माहौल खराब करना चाहते हैं तो उनके बारे में कुुछ कह नहीं सकते। इसके बाद इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने से इंकार कर दिया। जब अनुसूचित जाति के मोहल्ले में गए तो मुख्य गली पर पुलिस कर्मी तैनात थे और उन गलियों में जाने वाले लोगों पर नजर बनाए हुए थे। जब अनुसूचित जाति की गलियों में पहुंचे तो वहां पर सन्नाट पसरा हुआ था और लोग अपने घरों में ही काम करने में लगे हुए थे। जब शिकायकर्ता गुरमित के घर पर पहुंचे तो वह बाहर आया और के बाद गली के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।

हालांकि गांव में तनाव के चलते अनुसूचित जाति के लोगों के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। सभी लोगों ने उनके सामने आने वाली दिक्कतों के बताना शुरू कर दिया और स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा उन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। प्रवीण ने कहा कि स्वर्ण जाति के लोग इस बात से नाराज हैं कि गुरमित ने मारपीट को लेकर पुलिस केस क्यों दर्ज कराया। वह बिना शर्त केस वापस लेने को कह रहे हैं और ऐसा न होने तक मोहल्ले का बहिष्कार जारी रहेगा।

बच्चों की छूट रही है कोचिंग

गुरमित के चाचा रामफल ने कहा कि उन पर लगाई गई बंदी के चलते घर का काम चलाना मुश्किल हो गया है। उनको तो दूध मिल रहा, न लकड़ी और न ही पशुओं के लिए चारा मिल रहा है। इसलिए उनका जीना दुभर हो गया है। दुकानों से सामान नहीं मिलने के कारण मजबूरी में मोहल्ले में ही दुकान खोलनी पड़ी है। यहां तक कि बहिष्कार के कारण अनुसूचित जाति के लोग पढ़ाई करने तक नहीं जा पा रहे हैं। यहां तक कि मंदिर में लगे नलकूप से पानी तक नहीं लाने दिया जा रहा है। उनके मोहल्ली की लड़की शैलजा बैंक परीक्षा की तैयारी कर रही है और कोचिंग लेने शहर जाती है। इस विवाद के बाद उसे कोई आटो और टैक्सी वाला अपनी गाड़ी में नहीं बैठाता। इसकी वजह से उसकी कोचिंग छूट रही है।

झोलाछाप डाक्टरों ने दवाई तक देने से किया मना

सुशील कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी व बेटी बीमार पड़ी है, लेकिन गांव के झोलाछाप डाक्टर उनको दवाई नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि डर के चलते उनके बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। इसलिए सामाजिक बहिष्कार करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

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