संजीवनी बनेगा रेडक्रास का ब्लड सेंटर, अगस्त से मिलने लगेंगे कंपोनेंट

जीटी रोड स्थित रेडक्रास ब्लड सेंटर घायलों-मरीजों के लिए संजीवनी बनेगा। अपग्रेडेशन और बिल्डिग नवीनीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। इसी माह कंपोनेंट लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।

JagranThu, 08 Jul 2021 04:32 AM (IST)
संजीवनी बनेगा रेडक्रास का ब्लड सेंटर, अगस्त से मिलने लगेंगे कंपोनेंट

जागरण संवाददाता, पानीपत : जीटी रोड स्थित रेडक्रास ब्लड सेंटर घायलों-मरीजों के लिए संजीवनी बनेगा। अपग्रेडेशन और बिल्डिग नवीनीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। इसी माह कंपोनेंट लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा। अगस्त से प्लेटलेट्स, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी), लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) जैसे ब्लड कंपोनेंट मिलने लगेंगे।

रेडक्रास सोसाइटी के जिला सचिव गौरव रामकरण ने बताया कि अपग्रेडशन में 80 लाख से अधिक का खर्च आना है। आइएसआरएल (इडियन सिथेटिक बूटाडाइन रबर प्लांट) ने 27 लाख 63 हजार 483 रुपये, आइओसीएल (इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड) 22 लाख 97 हजार, श्री सीमेंट ने 46 हजार 400 रुपये की मशीनरी खरीदकर दान दी है। इसमें दो डीप फ्रीजर, प्लेटलेट्स एगिटेटर, प्लाजमा थाविग बाथ, डोनर काउच, ब्लड कलेक्शन मानिटर, कंपोस्केल, प्लाजमा एक्सप्रेशर, ट्यूब सीलर, एफरेसिस मशीन, सेल काउंटर, एलाइजा रीडर, एलाइजा वाशर, पोर्टेबल डोनर टेबल, ब्लउ ट्रांसपोर्टेशन बाक्स, लेमिनर एयरफ्लो मिल चुकी है।

रेडक्रास सचिव के मुताबिक बिल्डिग में टायल्स लगाने का कार्य और पेचवर्क सात-आठ दिन का है। बिल्डिग की साफ सफाई के बाद मशीनरी इंस्टाल कराई जाएगी। इसके बाद सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर आफिस में ब्लड कंपोनेंट लाइसेंस के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग (एफडीए) में आवेदन किया जाएगा। उम्मीद है कि इस कार्य को इसी माह कंप्लीट कर लिया जाएगा। लाइसेंस मिलते ही कंपोनेंट मिलने लगेंगे। अगले सप्ताह कंपनियों के अधिकारियों की विजिट

ब्लड सेंटर प्रभारी डा. पूजा सिघल ने बताया कि पेचवर्क पूरा होते ही सहयोग करने वाली तीनों कंपनियों के अधिकारियों की विजिट कराई जाएगी। ब्लड सेंटर के लिए डेढ़ टन के चार एसी भी खरीदे जाने हैं। रेडक्रास सोसाइटी ने बढ़ाया आमदनी का जरिया

जिला रेडक्रास सोसाइटी की गांव उझा में 14 कैनाल 11 मरला भूमि है। सोसाइटी ने उसे करनाल की कंपनी अर्थनारा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को शेड बनाकर बिजनेस करने के लिए दिया है। कंपनी यहां फ्लाई ऐश ब्रिक्स, पेवर ब्रिक्स, स्टील फर्नीचर तैयार कर, सप्लाई करेगी। ईंटों की बिक्री से 2.5, फर्नीचर से चार फीसद रकम सोसाइटी को मिलेगी। किसी कारण से बिजनेस नहीं चलता तो 60 हजार रुपये साल के मिलेंगे।

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