Agriculture News: धान की इन किस्‍मों पर बीमारी का खतरा, पूरे खेत की फसल सूखने का डर

धान की फसल इस समय लगभग तैयार हो चुकी है। फसल पर अब नजर बनाए रखने की जरूरत है। धान पर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। तेले की बीमारी पनपने का डर है। कीटों की वजह से पूरा पौधा पीला हो जाता है।

Anurag ShuklaThu, 16 Sep 2021 09:20 AM (IST)
धान की फसल में कीट का खतरा।

कैथल, जागरण संवाददाता। काला तेला व भूरा तेला बीमारी के प्रति किसान सचेत रहिए। क्योंकि काला व भूरा तेला बीमारी ऐसी बीमारी है, जो धान के पौधे के निचले हिस्से में लगती है। जहां से कीट रस चूसना शुरू कर देता है। कीटों के आक्रमण के बाद फसल पीली होकर सूख जाती है। शुरूआत में आक्रमण गोलकार टुकड़ियों से शुरू होता है। जोकि धीरे- धीरे बढ़ता है। समय पर राेकथाम न हो तो पुरे खेत की फसल को सूखा सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानिक डा. जसबीर ने बताया कि मौसम परिवर्तनशील होने के बाद इस बीमार का खतरा धान की किस्मों में रहता है। धान का अब हर रोज खेत में जाकर निरीक्षण करना चाहिए। इस बीमारी की जांच किसान बैठकर करें। खेत में इस बीमारी के जांच से पहले सफेद कागज जरूर रखें। पहले सफेद कागज पर पौधा टेडा करें, उसके बाद कीट आ जाए तो पेंसिल या डंडी लगाकर देखे। अगर तेला बीमारी है तो कीट टेडी व्यवस्था में चलेगा। एक पौधे पर पांच या इससे ज्यादा तेला दिखाई देने पर तुरंत 125 मि.ली डाइक्लोरवास नृवान 76 ई.सी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़क दें। पीठ वाले स्प्रें पंप से ही पेस्टीसाइड का छिड़काव अच्छा रहेगा। ट्रैक्टर वाले पंप का कम से कम इस्तेमाल करें।

इन किस्मों में रहता है खतरा

काला तेला बीमारी बासमती किस्म, 1121 किस्म, 1509 किस्म, मुच्छल किस्म, पीआर किस्म, पीबी-1718 किस्म, पीबी- 1637 किस्म, सरबती किस्म, एचकेआर, एचकेआर 125 किस्म, संकर धान किस्म सहित फसलों में बीमारी आने का खतरा रहता है।

ये सावधानी

खेतों में दवाई का छिड़काव करते समय का विशेषकर ध्यान रखें। गैस वाली दवा को जल्दी से जल्दी खेत में डालकर बाहर निकलें। वहीं डाइक्लोरवास नामक दवा से गैस निकलती है। किसान इस दवा का प्रयोग कम- से कम समय में करके खेत से बाहर निकल जाएं। पेस्टीसाइड दवाई का छिड़काव करते हुए मुंह से स्प्रे पंप की नाली को दूर रखें। दवाई छिड़काव के बाद हाथ साफ जरूर करें। वहीं दवाई के बाद नहाकर ही घर पर जाए।

रोकथाम

खेत में 5-10 हापर प्रति पौधा नजर आने पर 330 मि. लि बुप्रोफेजिन ट्रिब्यून 25 एस.सी या 250 मि.ली मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल या 125 मि.ली डाइक्लोरवास नृवान 76 ई.सी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़कें या 250 मि.ली डाइक्लोरवास 76 ई.सी को 1.5 लीटर पानी में मिलाकर फिर इस घोल को 20 किलो रेत में मिलाकर खड़े पानी में प्रति एकड़ डालें। इन कीटनाशकों का छिड़काव पौधे के निचले भाग की ओर करें। आवश्यकतानुसार कीटनाशक बदल 10 दिन बाद फिर छिड़काव करें। ओशीन 80 ग्राम प्रति एकड़, चेस 120 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव क

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