फिर विवादों में यमुनानगर नगर निगम, फर्जी लेटर हेड पर हो रही अवैध कालोनियों में रजिस्ट्रियां

यमुनानगर नगर निगम का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। अब अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्रियों को लेकर निगम फिर से विवादों में घिर गया है। इन रजिस्ट्रियों में नगर निगम के फर्जी लेटर हेड का प्रयोग किया गया है। डीएमसी ने इस मामले में एसपी को पत्र लिखा है।

Umesh KdhyaniFri, 18 Jun 2021 04:25 PM (IST)
लेटर हेड की छाया प्रति निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक नहीं है। हस्ताक्षर भी नकली हैं।

यमुनानगर [संजीव कांबोज]। नगर निगम एक बार फिर से विवादों में है। विकास कार्यों में कोताही के आरोप तो पहले से ही लगते रहे हैं। अब फर्जी लेटर हेड पर अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री करवाने के मामले ने सिस्टम पर सवाल उठा दिए। दो मामले संज्ञान में आने पर डीएमसी विनोद नेहरा ने एसपी कमलदीप गोयल को पत्र लिखा है। दरअसल, प्लाट की रजिस्ट्री कराने के लिए नगर निगम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाता है। इस बात का प्रमाण होता है कि रजिस्ट्री के लिए यह कालोनी सभी नियमों पर खरी है। नियम है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री नहीं हो सकती।

यह भी जानिए

नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी में कुल 22 वार्ड हैं । 2008 के सर्वे में 217 अवैध कालोनियों की लिस्ट तैयार हुई थी। उसके बाद फिर सर्वे हुआ। इसमें संख्या घटकर 105 रह गई। दो वर्ष पहले 69 अवैध कालोनियों को सीएम ने वैध घोषित किया। ये कालोनियां 20-25 वर्ष पुरानी हैं।

हस्ताक्षर भी फर्जी, क्रमांक नंबर भी नहीं

रजिस्ट्री से पहले रिपोर्ट के लिए आई फाइल की जांच के बाद सामने आया कि लेटर हेड की छाया प्रति निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक नहीं है। पत्र पर किए गए हस्ताक्षर भी नकली हैं और क्रमांक नंबर भी नहीं लगाया गया है। पत्र पर ईओ के हस्ताक्षर किए हुए हैं। फर्जी क्रमांक नंबर लिखा हुआ है। ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रार्थी ने उक्त पत्र को फर्जी तरीके से तैयार किया है। इसी के आधार पर तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री करवाई जा रही है। एक के बाद दूसरा मामला सामने आया। संदेह बढ़ता गया। निगम अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी तरह अवैध है। एसपी को लिखे पत्र में उन प्लाटों व पात्रों का भी हवाला दिया गया है जिनका विवरण इस पत्र में है।

प्रकरण के पीछे बड़ा भू-माफिया

कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में बड़ा भू-माफिया की सक्रियता हो सकती है। क्योंकि अवैध कालोनियों में खरीद-फरोख्त से उनको ही फायदा होता है। यहां प्लाट सस्ते दामों में उपलब्ध हो जाता है। उसको फिर मोटी रकम में बेचा जाता है। रजिस्ट्री होने के बाद वैधता पर सवाल नहीं उठता है। इस मामले में प्रापर्टी की खरीद फरोख्त से जुड़े शहर के कुछ लोग जांच के दायरे में हैं। हालांकि अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन इसके पीछे बड़ा घोटाला होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

इस एंगल से भी देखा जा रहा

पत्र प्लाट की रजिस्ट्रियों के क्रमांक नंबरों का उल्लेख है। यह नंबर क्रमवार भी हैं। इस मामले में निगम कर्मचारियों की मिलीभगत होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि निगम अधिकारी अभी इस बात को सिरे से नकार रहे हैं। लेकिन फर्जी तरीके से तैयार किया गया पत्र जिसके तरीके से तैयार किया गया है, वह कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

मामला संगीन, तह तक जाएंगे

डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर विनोद नेहरा ने कहा कि प्लॉट की रजिस्ट्री करवाने के लिए फर्जी तरीके से तैयार किए गए दो पत्र सामने आए हैं। मामला संगीन है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसकी तह तक जाएंगे। हर एंगल से जांच की जाएगी। अपने स्तर पर जांच के साथ-साथ आवश्यक कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा गया है।

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