कोरोना के डर के बीच विशेषज्ञों की राय पढ़ें, घर पर ही आइसोलेट होकर हो जाएंगे ठीक

कोविड के मामूली लक्षण में घबराए नहीं।

जिनको बेड की जरूरत नहीं वो भी दौड़ रहे विशेषज्ञ बोले-भयभीत न हों। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज के कोविड-19 के नोडल अधिकारी डा. अभिनव डागर ने कहा हर संक्रमित को बेड की नहीं जरूरत इस दौड़ में सभी दौड़ेंगे तो जरूरतमंद हार जाएंगे जिंदगी की जंग।

Anurag ShuklaThu, 06 May 2021 03:30 PM (IST)

करनाल, [प्रदीप शर्मा]। कोरोना महामारी के खिलाफ जंग मुश्किल होती जा रही है, लेकिन लोगों की लापरवाही कोरोना के खिलाफ इस डगर को और कठिन बना रही है। लोगों के संक्रमित होने की रिपोर्ट आते ही वे भयभीत हो जाते हैं और अस्पतालों में बेड ढूंढने के प्रयासों में लग जाते हैं। 

सच्चाई यह है कि कोरोना संक्रमितों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा को बेड की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन भय के माहौल में सब किसी भी कीमत पर बेड लेने के लिए दौड़ते हैं। इस दौड़ में सभी दौड़ने लग गए तो वह वर्ग बेड से वंचित रह सकता है जिन्हें बेड, आक्सीजन या वैंटीलेटर की सख्त जरूरत है। जरूरतमंद कोरोना से हार जाएगा। इस विषय को लेकर दैनिक जागरण ने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज के कोविड-19 के नोडल अधिकारी डा. अभिनव डागर से विस्तृत बातचीत की।

डा. अभिनव डागर के मुताबिक

जानिये कब पड़ेगी आपको बेड की जरूरत

1. अगर आप संक्रमित हैं और आपका गला खराब और खांसी है तो घबराएं नहीं घर पर ही चिकित्सक की सलाह से आसानी से ठीक हो सकते हैं। ऐसे में अस्पताल में बेड की जरूरत नहीं होती।

2. दो से तीन दिन तक 99 से 100 बुखार आ रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सकों की सलाह लेते रहें, अपने स्तर पर किसी भी अंग्रेजी दवाई को ना लें, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन लेते रहें।

3. लगातार पांच दिन से बुखार 101 से ऊपर है तो बिना देरी अस्पताल में चेकअप कराएं, चिकित्सक की सलाह पर अस्पताल में दाखिल हों।

4. कोरोना वायरस का फेफेड़ों पर अटैक सबसे पहले होता है, ऐसे में आक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। आक्सीजन 90 से ऊपर है तो घबराएं नहीं। 90 से नीचे आक्सीजन का लेवल जा रहा है तो सावधान हो जाइए। आक्सीजन बेड की आवश्यकता पड़ सकती है।

रेमडेसिविर के लिए दौड़ना कहां तक ठीक?

डा. डागर के मुताबिक एम्स दिल्ली की रिवाइज गाइडलाइन में स्पष्ट है कि रेमडेसिविर लगाने के बाद तय नहीं है कि मरीज को इसका फायदा होगा या नहीं। न ही देखने में आया है कि इस इंजेक्शन के बाद मौत के रिस्क कम हो गया हो। जो मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर है, आइसीयू में है, उसकी स्थिति के अनुसार चिकित्सक तय करता है कि कब और किस समय इंजेक्शन दिया जाना है। अभी तक की रिसर्च में यह नहीं आया है कि रेमडेसिविर लगाए जाने के बाद कोरोना संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसलिए लोग इसके पीछे ना भागें।

इसलिए बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

1. कोरोना को हल्के में लेना, लक्षण आने के बाद भी कोरोना की जांच नहीं कराना।

2. लोग बिना जांच कराए अपने स्तर पर ही दवाइयां ले लेते हैं, जिससे संक्रमण रुकने की बजाय तेजी से मल्टीप्लाई हो रहा है। मरीज की हालात गंभीर होने के बाद उसकी मौत हो जाती है।

3. वैक्सीनेशन को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां भी कारण हैं। जो वैक्सीनेशन कराने योग्य हैं, वे नहीं लगवा रहे हैं तो संक्रमण आसानी से शिकार बना रहा है।

कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही बरती तो समझो चपेट में आ गए। संक्रमण आसपास ही है। ऐसे में हर समय सचेत रहने की जरूरत है। हल्के लक्षण आते ही कोरोना की जांच कराएं। चिकित्सक की सलाह से इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी खान-पान, मल्टी विटामिन दवाइयों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। सरकारी गाइडलाइन का पालन आवश्यक रूप से करें। जिले में लगातार बढ़ रहे केस लोगों की लापरवाही का भी एक कारण है। बेवजह अस्पतालों में बेड के लिए दौड़ ना लगाएं, ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन में रहकर ठीक हो रहे हैं। बहुत कम परिस्थितियों में ही मेडिकल संसाधनों की जरूरत पड़ती है। घर पर रहिये-सुरक्षित रहिये।

डा. अभिनव डागर, नोडल अधिकारी, कोविड-19, केसीजीएमसी करनाल।

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