भड़काऊ भाषण देने वाले किसान की जमानत के लिए कोर्ट में हुई सुनवाई, रणदीप सुरजेवाला ने की पैरवी

जींद में सीएम के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने वाले किसान की जमानत के लिए कोर्ट में सुनवाई हुई। किसान की ओर से कांग्रेस के राष्‍ट्रीय महासचिव और एडवोकेट रणदीप सुरजेवाला ने पैरवी की। किसान दलबीर पर भड़काऊ भाषण देने के सदर थाने में दर्ज हैं दो मामले।

Anurag ShuklaWed, 09 Jun 2021 04:00 PM (IST)
किसान नेता दलबीर सिंह के पक्ष में पैरवी को जाते रणदीप सुरजेवाला।

जींद, जेएनएन। इंटरनेट मीडिया पर लोगों को भड़काने व मुख्यमंत्री मनोहरलाल को जान से मारने की धमकी के मामले में जेल में बंद किसान नेता दलबीर सिंह की जमानत पर बहस करने के लिए बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बतौर वकील सेशन कोर्ट में पहुंचे। लगभग पौने दो घंटे चली बहस के बाद अदालत ने दलबीर सिंह की जमानत का फैसला सुरक्षित रख दिया।

पैरवी करने के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कोर्ट जो फैसला देगा, वो सबको मंजूर है, लेकिन सरकार किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। साजिश के चलते किसान नेता दलबीर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सरकार ने साजिश के तहत चार साल पहले किसान नेता दलबीर सिंह पर दर्ज किया है।

गौरतलब है कि 29 मई को बीबीपुर गांव के किसान दलबीर सिंह को सदर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया गया था। जिसमें दलबीर सिंह सीएम मनोहर लाल के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे थे। पुलिस ने उस पर मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी, भडकाऊ भाषा का प्रयोग समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

किसानों ने दलबीर सिंह की रिहाई की मांग को लेकर 30 मई को जींद-भिवानी रोड पर जाम भी लगाया था। वहीं 22 फरवरी 2017 का भी जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इन दोनों मामलों में कार्रवाई करते हुए दलबीर सिंह को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पैरवी के बाद पत्रकारों से बातचीत में रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कानून की अदालत के दरवाजे खटखटाए हैं। दोनों मुकदमे नाजायज हैं। दलबीर सिंह को जमानत मिलनी चाहिए। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।

सुरजेवाला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को मीठी गोली देना बंद करें और जनता पर लगाए भारी-भरकम टैक्स कम कर राहत दी जाए। केंद्रीय कृषि मंत्री कहते हैं कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन तीनों कृषि कानूनों की वापसी नहीं होगी। सरकार अपने तीन पूंजीपति मित्रों की गोदी में बैठी हुई है। किसान, मजदूर व गरीब से इनका कोई लेना-देना नहीं है। प्रदेश सरकार किसान, मजदूर और आढ़तियों को जान-बूझकर उत्तेजित कर रही है, ताकि उन पर लाठियां बरसाई जाएं। ये सरकार किसान, मजदूर, दुकानदार, आढ़ती की दुश्मन है।

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