हरियाणा के कई जिलों में बारिश, मंडियों में भीगा धान, तेज हवा के कारण खेतों बिछी फसल

अचानक मौसम परिवर्तन की वजह से किसानों को नुकसान उठाना पडद्य रहा है। मंडियों में धान भीग रहा है। खेतों में लगी फसल बिछ गई है। मंडियों में फसल बचाव के इंतजाम अधूरे हैं। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें।

Anurag ShuklaMon, 18 Oct 2021 04:26 PM (IST)
ढांड की अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे बरसात में भीगा धान।

पानीपत, जागरण टीम। प्रदेशभर में मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। रविवार को हुई बारिश के कारण कैथल और यमुनानगर में धान की लाखों बोरियां बारिश के कारण भीग गईं। अकेले कैथल की मंडियों में डेढ़ लाख से अधिक धान की बोरियां भीग गईं। मंडियों में अधूरे इंतजाम के कारण किसानों को भारी नुकसान होगा। कई मंडियों में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं थी। किसान और आढ़ती अपने स्तर पर व्यवस्था करने में जुटे थे। जिन किसानों का धान भीग चुका है उन्हें बेचने के लिए सूखने का इंतजार करना पड़ेगा या औने-पौने दामों में बेचना पड़ेगा। प्रदेश के बाकी जिलों में हल्की बारिश हुई जहां कम नुकसान है। अगले दो दिन भी किसानों का सिरदर्द बढ़ाने वाले है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों में बारिश के आसार हैं।

कैथल स्थित पुरानी अनाज मंडी के प्रधान श्याम लाल ने बताया कि शहर के बीचों-बीच 12 एकड़ में मंडी है। बरसात से बचाव को लेकर स्वयं ही प्रबंध करने पड़े। इसके बावजूद 30 से 35 हजार के करीब कट्टे बरसात में भीग गए। नई अनाज मंडी में 70 हजार के करीब कट्टे बरसात में भीगे। यहां भी आढ़तियों को स्वयं ही बरसात से धान को बचाने का प्रबंध करना पड़ा।

धान के बचाव का नहीं पुख्ता प्रबंध

यमुनानगर के बिलासपुर से मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान सर्बजीत ङ्क्षसह व अरुण कुमार ने बताया कि धान की कटाई के बाद भंडारण की जगह न होने के कारण वह आधी रात को ही धान की कटाई कर मंडी में पहुंच गए थे। मंडी के शेड व अधिकतर फड़ों पर पिछले सीजन को गेहूं भरा होने के कारण किसानों को मंडी में अपनी ट्रालियों को बारिश से बचाव करने के लिए इधर-उधर खड़ी करनी पड़ी। बारिश आने पर आढ़तियों द्वारा धान की बोरियों पर तिरपाल से ढक कर बचाव किया गया।

वहीं कैथल के ढांड निवासी किसान बलजीत ङ्क्षसह, सावन कुमार ने बताया कि तीन दिन मंडी में धान लिए बैठे हैं, लेकिन किसी भी एजेंसी ने धान नहीं खरीदा। बारिश से धान गीला हो गया है। बारिश ने मुश्किल बढ़ा दी है।

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक फसलों पर बारिश का प्रभाव

धान : अगेती बिजाई करने वाले किसानों को धान में नुकसान होता दिख रहा है।

कपास : इस बारिश में टिंडे गल रहे हैं और फूल भी काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में कपास में भारी नुकसान है।

बाजरा- अभी तक तो अधिक नुकसान नहीं है, मगर आगे लगातार बारिश हुई तो इस फसल में भी नुकसान हो सकता है।

मूंग- इस फसल में अधिक नुकसान हुआ है। फलियों पर पानी पडऩे से यह काली हो जाती है।

ग्वार - इस फसल में अंगमारी बीमारी नमी के कारण आ रही है। इस सफल में भी बारिश का नुकसान है।

अब रात्रि तापमान में हो सकती है बढोतरी

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बारिश के समय बादलवाई रहती है जिसके कारण रात्रि तापमान में इजाफा होता है। बारिश से रात के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

बढ़ जाएगी नमी, नहीं खरीदेंगी एजेंसियां

बारिश अधिक होने पर धान में नमी की मात्रा बढ़ जाएगी। अगर यह मात्रा 17 फीसद से अधिक हो गई तो खरीद एजेंसियां खरीदने से इन्कार कर सकती हैं। किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर धान बेचना पड़ेगा, क्योंकि सरकार की ओर से नमी की मात्रा अधिकतम 17 फीसद निर्धारित है। ऐसी स्थिति में किसानों को धान सुखाना पड़ेगा जिसमें अतिरिक्त समय तो लगेगा ही, उनको अतिरिक्त पूंजी भी खर्च करना पड़ेगा।

फसलों को नुकसान, वायु प्रदूषण से मिलेगी राहत

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने एक कम दबाव के क्षेत्र से हरियाणा में 18 और 19 अक्टूबर को भी बारिश के आसार हैं। बारिश आई तो वायु प्रदूषण से राहत मिल सकती है। फसलों के लिए बारिश हानिकारक हो सकती है।

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