हरियाणा-उत्‍तर प्रदेश आना जाना और सुगम, यमुना नदी के नगली घाट पुल का काम जल्‍द होगा पूरा

हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश के लोगों के राहत भरी खबर है। यमुना नदी के नगली घाट पर बन रहे पुल का काम करीब 60 फीसद पूरा हो चुका है। 576 मीटर लंबाई पुल की है। 2900 मीटर सड़क की लंबाई हरियाणा की ओर है।

Anurag ShuklaTue, 22 Jun 2021 08:53 AM (IST)
हरियाणा-उत्‍तर प्रदेश के लिए यमुना नदी में बन रहा पुल।

यमुनानगर, जेएनएन। उत्‍तर प्रदेश व हरियाणा में आवागमन के लिए यमुना नदी के नगली घाट पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य 60 फीसद पूरा हो गया है। पीड्ब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक अप्रैल-2022 में यह पुल बनकर तैयार हो जाएगा। पिल्लर तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।बता दें कि पुल की कुल लंबाई करीब 576 मीटर है। हरियाणा की ओर सड़क की लंबाई 2900 मीटर और उप्र की ओर करीब 10 किलोमीटर बताई जा रही है। परियोजना पर कुल 95 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

तय नहीं करनी पड़ेगी दूरी

हरियाणा व उप्र के बीच बह रही यमुना नदी पर कलानौर से लेकर करनाल के शेरगढ़ टापू तक अन्य कोई पुल नहीं है। ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करके गंतव्य स्थान पर पहुंचना पड़ता है। नगली घाट पर पुल का निर्माण होने से हरियाणा सहित उत्तर प्रदेश के लोगों को भी फायदा होगा। यह पुल हरियाणा से सहारनपुर के नकुड़ को जोड़ेगा। इससे एरिया के लोगों को 30 किमी दूर से घूमकर नहीं आना पड़ेगा। दूसरा बड़ा लाभ उन किसानों को होगा, जिनकी यमुना के पार जमीन पड़ती है। उन्हें बरसात के दिनों में अपने खेतों में जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है।

हरियाणा के इन गांवों को होगा फायदा

जठलाना क्षेत्र के गांव संधाला, संधाली, माजरी, गुमथला, एमटी करहेडा, जठलाना, उन्हेडी, बागवाली, पौबारी, निकुंभ आदि गांवों के किसानों की यमुना नदी पार लगभग पांच हजार एकड़ भूमि है। इस पर किसान खेती कर रहे हैं। यमुना में बाढ़ आने पर किसान नदी पार खेतों में नहीं जा पाते। इसके लिए उन्हें कलानौर के रास्ते उत्तर प्रदेश के नसरूलागढ़ व टाबर गांव का सहारा लेना पड़ता है। इससे धन व समय खराब होते हैं। पूर्व जिला परिषद सदस्य शिव कुमार संधाला का कहना है कि पुल के निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके चालू होने से क्षेत्रवासियों को लाभ होगा।

किसानों की यह समस्या

जिन किसानों की भूमि ओवरब्रिज के निर्माण के लिए अधिग्रहण की गई है उनमें से कुछ किसानों ने विभाग के नाम रजिस्ट्री करवाने से मना कर दिया। किसानों का कहना है कि राजस्व रिकार्ड में उनकी जमीन को अभी तक दरियाबुर्द दिखाया गया है। जबकि उनकी भूमि में अब बेहतर खेती होती है। ऐसे में उन्हें भूमि की मार्केट वेल्यू के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन पहले दरियाबुर्द थी। जमीन के ऊपर से पानी चलता था। लेकिन पिछले कई वर्ष से जमीन में बेहतर खेती होने लगी है। लेकिन राजस्व विभाग में रिकार्ड पुराना ही है। अब पीड्ब्ल्यूडी विभाग ने पुल के निर्माण के लिए उनकी भूमि का अधिग्रहण किया है। लेकिन उनकी भूमि के रेट दरियाबुर्द के हिसाब से ही लगाएं है, जो कि गलत है

यमुना नदी के नगली घाट पर पुल निर्माण का कार्य प्रगति पर है। 66 प्रतिशत काम हो चुका है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द काम पूरा हो। यह पुल हरियाणा व उप्र को जोड़ने का काम करेगा। किसानों की मांग डीसी के माध्यम से सरकार को भेजी हुई है।

राज कुमार, एक्सइएन, पीडब्ल्यूडी।

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