इस वजह पानीपत टेक्‍सटाइल सिटी का डंका, निर्यात उद्योग ही महामारी में बने संकट मोचन

पानीपत में ही सबसे अधिक टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात।

पानीपत टेक्‍सटाइल सिटी निर्यात उद्योग के लिए बेहतर काम कर रही। 20 हजार करोड़ का सालाना टेक्सटाइल निर्यात होता है। 60 हजार करोड़ का घरेलू और निर्यात कारोबार है। 40 हजार करोड़ का घरेलू उत्पादन करने वाले उद्योग बंद हैं। 35 प्रतिशत लेबर के भरोसे चल रहे उद्योग।

Anurag ShuklaMon, 17 May 2021 11:36 AM (IST)

पानीपत, जेएनएन। कोरोना महामारी और लॉकडाउन में देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए निर्यात और निर्यात उन्मूलक यूनिट (इकाइयां) संकट मोचन का काम कर रही हैं। पूरे प्रदेश में पानीपत में ही सबसे अधिक टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात होता है। यहां के उद्योगों से सालाना 20 हजार करोड़ से अधिक का निर्यात होता है। हजारों उद्योग सहित लाखों वर्कर यहां के निर्यात उद्योग पर निर्भर हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में पानीपत में 30-35 फीसद ही कामगार बचे हैं। इन्हें यहां के निर्यात उद्योग से ही रोजगार मिल रहा है। 

घरेलू इंडस्ट्री जो निर्यात से तीन गुना अधिक है, कोरोना कफ्र्यू के बाद से ही पूरी तरह से ठप हो गई हैं। थोड़े बहुत उद्योग ही चल पा रहे हैं। ये उद्योग भी अपने स्थायी कर्मचारियों को काम देने के लिए ही चल रहे हैं। जो उत्पादन हो रहा वह स्टाक किया जा रहा है। ज्यादातर घरेलू उत्पादन में लगी इंडस्ट्री में उत्पादन बंद चल रहा है। 

निर्यात के बराबर मिल रहे आर्डर 

टेक्सटाइल विशेषकर हैंडलूम के निर्यातकों को आर्डर लगातार मिल रहे हैं। आर्डर भरपूर होने के कारण उद्योग चल रहे हैं। इन उद्योगों से संबंधित डाइंग उद्योग, शटल लैस उद्योग, पैकिंग उद्योग, यार्न उद्योग चल रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि पुराने ऑर्डर पूरे करने के साथ-साथ नए आर्डर भी लिए जा रहे हैं। हालांकि धागे से लेकर रंगाई तक (कच्चे माल से लेकर परिवहन, पैकिंग सहित) दाम तेज होने के कारण नए आर्डर लेने में मुनाफा घ्टा है 

ये उद्योग बंद हैं

पानीपत में सबसे सस्ता कपड़ा वाटरजेट पर बनता है। इनपर 23-24 रुपये मीटर का कपड़ा बनता है। ये वाटरजेट बंद हैं। इनसे जुड़े प्रिटिंग के उद्योग भी बंद हैं। 3डी चादर की डिमांड ठप होने, सोफे के कपड़े की मांग ठप होने से ये यूनिट बंद है। तीन महीने से मिंक कंबल के यूनिट भी बंद चल रही हैं। इस बार ङ्क्षमक कंबल के सीजन में धागे के दामों में अप्रत्याशित तेजी आने के कारण ङ्क्षमक कंबल उद्योग समय से पहले बंद हो गए थे। पॉलिस्टर धागे के दाम 82 रुपये किलो से बढ़कर 120 रुपये किलो तक पहुंच गए थे। वर्तमान में धागे के दाम 90-92 रुपये प्रति किलो पर आ चुके हैं। मिंक कंबल कारोबारी अब दोबारा उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है।

निर्यातक उद्योगों को भी कोरोना वारियर्स घोषित किया जाए

कोरोना महामारी में सहायता देने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था, रोजगार देने में निर्यात व निर्यात उन्मूलक इकाइयां ही सहायक बनी हुई है। पूरे प्रदेश के बात करें तो पानीपत में ही उद्योग चल रहे हैं। प्रदेश के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है। ऐसे में इन्हें भी कोरोना वारियर्स घोषित किया जाना चाहिए।

-सुरेश गुप्ता, टेक्सटाइल उद्यमी  पानीपत

 

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