Eid Al-Adha 2021 : बकरीद कल, पानीपत में 45 हजार में बिका सबसे महंगा बकरा

ईद उल अजहा यानि बकरीद बुधवार को है। पानीपत में 45 हजार का सबसे महंगा बकरा बिका। इस बार बकरा मार्केट में महंगाई का असर दिखा। संजय चौक पर तीन ही बकरे बिके। मस्जिदों में भीड़ न इकट्ठी करने के निर्देश भी हैं।

Umesh KdhyaniTue, 20 Jul 2021 09:46 PM (IST)
बकरीद के लिए पानीपत में जाटल रोड पर बिकने के लिए पहुंचे बकरे।

जागरण संवाददाता, पानीपत : कुर्बानी का त्योहार बकरीद बुधवार को मनाया जाएगा। महंगाई के कारण बकरों की बिक्री नहीं हो सकी। जाटल रोड पर देर शाम तक बकरे बेचने वाले मायूस खड़े रहे। इन लोगों ने बताया कि पहले तो दोपहर तक ही सभी बिक जाते थे। इस वर्ष सबसे महंगा बकरा 45 हजार का बिका।

वैसे कोरोना के कारण बकरीद का त्योहार सार्वजनिक तौर पर नहीं मनाया जा रहा। इमाम सलीम अहमद रहीमी ने बताया कि दो दिन पहले ही ऐलान कर दिया गया था कि मस्जिदों में भीड़ नहीं की जाएगी। चुनिंदा लोग ही सुबह नमाज अदा करने आएंगे। पानीपत में 54 मस्जिद हैं। प्रमुख रूप से माईजी मस्जिद, हाली कालोनी, मनमोहन नगर स्थित मस्जिद, माडल टाउन के ईदगाह, गोसअली में त्योहार मनाया जाता था।

पर्व घरों में ही मनाएं

संस, सनौली : सनौली थाना एसएचओ नवीन कुमार ने लोगों को मस्जिदों में न जा कर घरों में ही रह कर बकरीद मनाने के लिए कहा है। सनौली खुर्द स्थित सबुली रिसाद मस्जिद, गांव राणा माजरा, गांव गढी बैसक, पत्थरगढ, जलालपुर द्वितीय, नवादा-आर, नवादा-पार में मुख्य तौरपर पर्व मनाया जाता है। एसएचओ नवीन कुमार ने ग्र‎ामीणों से कहा कि कोरोना महामारी के चलते सभी मस्जिद में भीड़ नक रें। गांव सनौली खुर्द स्थित सबिलु रिसाद मदरसे के हाजी मौलवी हारुण मजीदी ने भी ईद पर्व पर घरों में ही मनाने का संदेश दिया।

यमुनानगर में जागरूकता रैली निकाली, भाईचारे की अपील 

संवाद सहयोगी, छछरौली (यमुनानगर)। गांव जयधर में विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने बकरीद पर पशुओं की बलि देने का शांतिपूर्वक विरोध किया। उन्होंने बकरीद शांति और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की। बकरीद से एक दिन पहले समुदाय को जागरूक करने के लिए जागरूकता रैली भी निकाली। जिसमें भाईचारा व दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की गई। हिंदू समुदाय से अमित कुमार, मांगेराम, नकली राम, महावीर, कुलदीप, राजकुमार, सागर का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपना त्योहार मनाते समय हिंदू समुदाय की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। उन्हें कुर्बानी के समय ऐसे स्थान को चुनना चाहिए जो एकांत में हो।

मुस्लिम समुदाय की सराहनीय पहल

वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय से मजीद खान, हाजी लियाकत, जाहिद हसन, इसफाक, दिलशाद, मोनू का कहना है जो त्योहार दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाए, उस त्योहार को मनाने का कोई मतलब नहीं है। हमारे बुजुर्ग सदियों से एक दूसरे के साथ मिलकर शांति से रहते आए हैं। इस बार भी हम हिंदू समुदाय की भावना का पूरा ख्याल रखेंगे। यदि किसी को कोई आपत्ति है तो गांव के सभी समुदाय के बुजुर्ग इकट्ठे होकर मिलकर हर समस्या का समाधान कर सकते हैं। 

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