Olympics Tokyo : ओलिंपिक में पहलवान अंशु मलिक की हार का ये रहा बड़ा कारण, अनुभवी खिलाड़ी से था सामना

जींद की अंशु मलिक को पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि अभी उम्‍मीद खत्‍म नहीं हुई है। 57 किलो भार में अंशु मलिक को बेलारूस की खिलाड़ी ने मात दी। अंशु ने आक्रामक खेल दिखाया। पिता ने कहा अंशु ने बेहतर खेला।

Anurag ShuklaWed, 04 Aug 2021 12:07 PM (IST)
टोक्यो ओलिंपिक में 57 किलो भार वर्ग में अंशु।

जींद, जागरण संवाददाता। टोक्यो ओलिंपिक में 57 किलो भार वर्ग में भारत की पहलवान अंशु मलिक अपना पहला मुकाबला हार गई। महज 20 साल की उम्र में अंशु पहली बार ओलिंपिक में खेल रही। मैच में अंशु के आक्रामक तेवर देखने को मिले। कई बार वह अनुभवी खिलाड़ी पर भारी दिखीं।

अंशु के पिता धर्मवीर ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि बेटी का मैच देखने पर साफ लग रहा था कि अनुभव की कमी है। 20 साल की उम्र में यह उसका पहला ओलिंपिक मैच था। हमें उम्मीद थी कि वह मेडल जीतकर लाएगी। उसकी तैयारी भी बहुत अच्छी थी। लेकिन बेलारूस की खिलाड़ी काफी अनुभवी थी। वह दो बार की विश्व चैंपियनशिप में मेडलिस्ट है और उसके सामने अंशु का अनुभव काफी कम था। बेलारूस की खिलाड़ी ने अंशु की कमियों का फायदा उठाया और अंक लेती रही।

पिता धर्मवीर ने कहा कि उन्हें कोई निराशा नहीं है। अभी मेडल जीत सकती है। वहीं, अगले ओलिंपिक के लिए भी तैयारी कराएंगे। अभी एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए खूब जोर लगा देंगे। अंशु का सपना ओलिम्पिक मेडल लेकर आना है। अगले 4 साल उसी के लिए खूब मेहनत करेंगे। अंशु की मां बेटी की हार से थोड़ी निराश जरूर दिखाई दी, लेकिन कहा कि हार-जीत मैच का हिस्सा है। वह बेटी के खानपान पर और ज्यादा ध्यान देगी। बेटी को इतनी ताकतवर बनाउंगी कि अगले मेडल में ओलिंपिक में देश का तिरंगा लहराएगी।

कुछ इस तरह चला मुकाबला

उन्हें बेलारूस की खिलाड़ी ने 8-2 के अंतर से हराया। अंशु मलिक के पास यह मैच जीतने के कई मौके थे, लेकिन बड़े मैचों में अनुभव की कमी खली और वह यह मैच गंवा बैठी। 6 मिनट के मैच में 3-3 मिनट के दो राउंड थे। पहले राउंड में अंशु 2-0 से पीछे हो गई थी। इसके बाद अंशु के पास अंक लेने के कई मौके आए, लेकिन वह इन मौकों का फायदा नहीं उठा सकी। 2-0 से पीछे होने के अंशु ने अंक लेने की कोशिश की, लेकिन बेलारूस की खिलाड़ी को ही 2 अंक दे बैठी। इस तरह पहले मुकाबले में 4-0 से पीछे होने के बाद अंशु पर मानसिक रूप से दबाव था। दूसरा राउंड शुरू होने पर अंशु ने आक्रामक खेल दिखाया और बेलारूस की खिलाड़ी को मैच से बाहर धकेल कर दो अंक हासिल किए। ऐसा लग रहा था कि अंशु कमबैक करेगी और मुकाबला अपने पक्ष में कर सकती है। लेकिन अपनी गलतियों के कारण बार-बार अंक देती रही।

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