हरियाणा के दो गांव ऐसे, जहां नहीं होती पानी की बर्बादी, अब नजर आएंगे डॉक्यूमेंट्री में

हरियाणा के दो गांव जल संरक्षण की मिसाल पेश कर रहे हैं। एक गांव महेंद्रगढ़ का कोथल खुर्द है और दूसरा अंबाला का तेपला। अब इन दोनों गांवों पर दिल्ली में डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही है। तेपला गांव में जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति प्रयासरत है।

Umesh KdhyaniWed, 16 Jun 2021 06:35 AM (IST)
यहां पानी की बर्बादी नहीं होती। पूरे गांव के पानी को स्टोर कर दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है।

अंबाला [संजू कुमार]। हरियाणा में दो गांव ऐसे हैं, जिनमें पानी की बर्बादी नहीं होती है। बल्कि पानी को स्टोर कर इस्तेमाल में लाया जाता है। पहला गांव महेंद्रगढ़ का कोथल खुर्द है और दूसरा गांव अंबाला का तेपला गांव है। तेपला गांव की आबादी करीब ढाई से तीन हजार है। गांव में 600 से अधिक परिवार रहते हैं। इस गांव की खासियत है कि लोग पानी को उतना ही इस्तेमाल करते है। जितना जरूरत होती है।

दिल्ली में डॉक्यमेंट्री के लिए इन इन दोनों गांवों को ही चुना गया है। ताकि लाेगों को जागरूक कर सके। इन दोनों गांवों की तरह बाकी गांवों में भी पानी की बर्बादी को रोका जा सके। दिल्ली की दीपा कम्युनिकेशन ने रविवार को तेपला गांव में आकर डॉक्यूमेंट्री बनाई। इन गांवों में जल संरक्षण के लिए बनाए गए कुएं काे भी देखा। यहां पर खराब पानी को एकत्रित कर फिल्टर किया जाता है। साथ ही इस्तेमाल में लाया जाता है। पब्लिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेपला एक ऐसा गांव है, जिसमें पानी की शिकायत नहीं होती। गांव के लोग खुद पानी की बर्बाद होने से बचाते हैं। इसलिए गांव में हर किसी को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा।

हर घर में लगी टोटियां, पानी मिल रहा भरपूर

अंबाला के तेपला गांव में करीब 600 से अधिक परिवार रहते हैं। हर घर में पानी के लिए टोटियां लगी हैं। कोई भी घर ऐसा नहीं है, जिसमें पानी की कमी न हो। क्योंकि लोग पानी को खुला नहीं छोड़ते हैं। जितनी मात्रा में पानी की जरूरत होती है, उतना ही पानी इस्तेमाल करते हैं। इसलिए पानी का प्रेशर कम नहीं होता है। दूसरे लोगों को पानी आसानी से मिल जाता है।

पानी बचाने के लिए गांव में बनाए कुएं

गांवों में जल संरक्षण के लिए अलग-अलग स्थानों पर कुंए बनाए हुए हैं। कुएं के पास बड़ा तालाब है। सारे गांव का पानी कुएं में आता है। यहां पर अलग-अलग कुएं में पानी को फिल्टर कर इस्तेमाल में लाया जाता है। इसके अलावा गांव में दूसरे लोगों को जागरूक करने के लिए जगह-जगह जल संरक्षण को लेकर पेंटिंग और स्लोगन बनाए गए हैं।

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