एक कवि का यूं जाना...पानीपत के हास्य-व्यंग्य कवि योगेंद्र मौदगिल को कोरोना ने छीन लिया

पानीपत के राष्ट्रीय हास्य और व्यंग्य कवि योगिंद्र मुदगिल का निधन।

पानीपत के रहने वाले राष्‍ट्रीय हास्‍य और व्‍यंग्‍य कवि योगिंद्र मुदगिल अब नहीं रहें। कोरोना संक्रमित होने के साथ-साथ ह्रदय गति रुक जाने से उनका देहांत हो गया। हास्य कविताएं व्यंग्य लिखने वाले योगिंद्र मुदगिल टीवी शो में अपनी रचनाओं से लोगों का दिल जीत लेते थे।

Anurag ShuklaTue, 18 May 2021 02:51 PM (IST)

पानीपत, जेएनएन। पानीपत सांस्कृतिक मंच के संस्थापक, हास्य एवं व्यंग्य कवि योगेंद्र मौदगिल कोरोना से जंग हार गए। एक निजी अस्पताल में दाखिल थे। सोमवार रात को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। 

देशभर के शहरों में कवि सम्मेलनों की शोभा बढ़ाने वाले 58 वर्षीय मौदगिल पिछले वर्ष लाकडाउन के बाद से न्यू हाउसिंग बोर्ड कालोनी स्थित घर पर थे। पानीपत में ही जनवरी 2020 में उन्होंने कवि सम्मेलन में भाग लिया था। इस बीच, उन्होंने यू-ट्यूब पर अपने नाम से चैनल बना लिया था, जिस पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यंग्यात्मक तरीके से अपनी बात रखते।

दो बार फैक्ट्री लगाने वाले मौदगिल का मन कारोबार में नहीं लगा। कविता की दुनिया में ही लौट आए। वर्ष 2001 में उन्हें गढग़ंगा शिखर सम्मान, 2002 में कलमवीर सम्मान, 2006 में युगीन सम्मान, 2007 में उदयभानु हंस कविता सम्मान और 2007 में ही पानीपत रत्न सम्मान मिला। उनकी एक बेटी और एक बेटा है। बेटा सनौली रोड पर अटल सेवा केंद्र चलाता है। योगेंद्र मौदगिल पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। 

धरती से हर रोज सितारे जाते हैं, आसमान में कमी है शायद तारों की 

धरती से हर रोज सितारे जाते हैं, आसमान में कमी है शायद तारों की। फेसबुक पर ये लाइनें लिखने वाले योगेंद्र मौदगिल भी कोरोना से हारकर दुनिया से विदा हो गए। उदास चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेर देने वाले योगेंद्र मौदगिल अपने चाहने वालों को उदास कर गए। कोरोना संक्रमण के बाद ह्रदय गति रुक जाने से 58 की उम्र में उनका देहांत हो गया। प्रिंटिंग प्रेस से लेकर पोलिथिन बनाने की फैक्ट्री लगाने वाले मौदगिल का मन कभी कारोबार में नहीं लगा। हास्य कविताएं, व्यंग्य लिखने वाले योगेंद्र मौदगिल सब टीवी पर प्रसारित होने वाले वाह-वाह शो में भी प्रस्तुति दे चुके थे। पानीपत सांस्कृतिक मंच के संस्थापक सदस्य योगेंद्र के बिना पानीपत में कवि सम्मेलन होने की कल्पना नहीं हो सकती थी। वही मंच संभालते। देशभर से कवियों को आमंत्रित करते।

उनके मित्र संजीव त्यागी ने बताया कि योगेंद्रमौदगिल तो सभी को हंसाते थे। उन्हीं को रुलाकर दुनिया से विदा हो गए। लॉकडाउन के कारण कवि सम्मेलन बंद हो गए। तब उन्होंने योगेंद्र मौदगिल नाम से अपना यूट्यूब चैनल बनाया। राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखते। करारा व्यंग्य करते। उनके मित्र संजय जैन ने बताया कि परिवार उनका करनाल से यहां आया था। बिशन स्वरूप कालोनी में भाई रहते हैं। पिता सेल्स टैक्स विभाग आफिसर थे। मौदगिल न्यू हाउसिंग बोर्ड कालोनी में रहते थे। किसी भी तरह की परेशानी के वक्त अपनी मुस्कुराहट और हास्य व्यंग्य से दोस्तों को गुदगुदा देते थे।

छह मौलिक पुस्तकें योगेंद्र मौदगिल की कविताओं की छह मौलिक और 10 संपादित पुस्तकें प्रकाशित हुईं। देशभर के विभिन्न मंचों पर काव्य यात्राएं कीं। इसके अलावा कई सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों वह क्लबों से सम्मानित हुए। 

चैनलों में नियमित पाठ

चैनलों से नियमित कविता पाठ करते रहे। हरियाणा की एकमात्र काव्य पत्रिका कलमदंश का छह वर्षों तक निरंतर प्रकाशन व संपादन किया। कई राष्ट्रीय दैनिक अखबारों में दैनिक काव्य स्तंभ लिखते रहे।

प्रेम पर उनका हास्य

एक सम्मेलन में उन्होंने प्रेम की गहराई पर अपनी बात रखी। कहा, प्रेम की गहराई जो हरियाणा में पाई जाती है, वो शायद कहीं नहीं पाई जाती। कहा, सब कुछ लुटा दिया तेरे प्यार में सितमगर। एक भैंस बच गई थी, वो आज बेच दी। इससे ज्यादा गहराई कहीं नहीं पाई जा सकती। 

चेहरा नहीं देख सकी बहन

असंध रोड पर शिवपुरी में कोरोना गाइडलाइंस अनुसार शव का अंतिम संस्कार हुआ। जनसेवा दल के चमन गुलाटी ने बताया कि बहन अपने भाई का चेहरा देखना चाहती थी। लेकिन कोरोना गाइडलाइंस अनुसार ऐसा नहीं हो सकता था। बेटे का रो-रोकर बुरा हाल था।

 

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