पोस्ट कोविड में बच्चों में नई बीमारी का खतरा, किडनी, लीवर, जीवन भर के लिए बीमार बीमार हो सकते हैं बच्चे

अब बच्चों में भी पोस्ट कोविड बीमारियों का खतरा है। इन्हीं में से एक है एमआइएस-सी। यह बच्चों के हार्ट लिवर किडनी त्वचा आंख फेफड़ा और आंतों को प्रभावित करती है। कई बार बच्चों के हार्ट की कोरोनरी आर्टरी को खराब कर देता है।

Umesh KdhyaniSun, 20 Jun 2021 05:09 PM (IST)
जब इम्यूनिटी कम हो जाती है, तब यह बीमारी अंगों को खतरनाक रूप से प्रभावित करने लगती है।

यमुनानगर, जेएनएन। कोरोना महामारी को हरा चुके लोग अब पोस्ट कोविड बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इनमें बच्चे भी पोस्ट कोविड बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम (एमआइएस-सी) की बीमारी सामने आ रही है। हालांकि इस बीमारी के इक्का-दुक्का केस हैं। यह भी पोस्ट कोविड बीमारी के ही लक्षण हैं। यमुनानगर जिले में दो बच्चे इस बीमारी से पीड़ित मिले हैं। समय रहते ही इन बच्चों को इलाज के लिए पीजीआइ रेफर कर दिया गया। अब ये बच्चे ठीक हैं। 

यह बीमारी इसलिए भी खतरनाक है, क्योंकि यह बच्चों के हार्ट, लिवर, किडनी, त्वचा, आंख, फेफड़ा और आंतों को प्रभावित करती है। कई बार तो बच्चों के हार्ट की कोरोनरी आर्टरी को खराब कर देता है। इससे बच्चा पूरी उम्र के लिए बीमार हो सकता है। एमआइएस-सी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित करने वाली बीमारी है। जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तब यह बीमारी शरीर के अंगों को खतरनाक रूप से प्रभावित करने लगती है। 
ये हैं (एमआईएस-सी) के लक्षण
कोरोना संक्रमण से ठीक होने के दो से छह सप्ताह के बाद मुख्य रूप से 20 वर्ष से कम आयु वर्ग में यह बीमारी होती है। इसमें तेज बुखार आ जाता है। बच्चों के शरीर का तापमान 101 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर हो जाता है।  इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती हैं। शरीर पर दाने आना, पेट दर्द, उल्टी, हाथ पैर में सूजन और डायरिया इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। इसके अलावा शरीर पर कहीं खुजली होना और त्वाच का गुलाबी हो जाना, आंखों में खुजली होना, लगातार थकान की शिकायत करना,  गर्दन व पेट में दर्द होना, उल्टियां होना, बच्चों का ब्लड प्रेशर कम हो जाना, हृदय गति प्रभावित होना, अचानक दौरे पड़ना या बेहोश हो जाना भी इस बीमारी के लक्षण हैं। 
कोरोना की बीमारी न छिपाएं
कोरोना ने बच्चों को भी चपेट में लिया है। हालांकि बच्चों की इम्यूनिटी पावर काफी मजबूत होती है। इस वजह से बच्चे इस बीमारी से जल्दी ठीक हो गए। कोरोना की दूसरी लहर में करीब 500 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए। ये सभी 16 वर्ष से कम आयु के थे। यमुनानगर जिले में सात वर्षीय बच्ची की कोरोना संक्रमण से मौत भी हुई। अभिभावक भी कई बार बच्चों का इलाज कराते रहते हैं। कोरोना के लक्षणों की जांच नहीं कराते। यह लापरवाही भी भारी पड़ती है। 
तीन दिन से अधिक बुखार तो सचेत होने की जरूरत
सिविल सर्जन डा. विजय दहिया ने बताया कि एमआइएस-सी से पीड़ित बच्चे को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। जिन बच्चों में इस बीमारी के लक्षण हैं, उनके स्वजन को पूरी बात बतानी चाहिए। यदि किसी बच्चे को कोरोना भी हुआ है, तो उसके बारे में भी खुलकर बताएं। यदि बच्चे को तीन दिन से अधिक बुखार रहे तो सचेत होने की जरूरत है। कई बार बच्चों को कोरोना हो जाता है और इसका पता नहीं चलता। ऐसे में ये बीमारी और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है। एंटीबाडी टेस्ट, सीआरपी टेस्ट ( सी रिएक्टिव प्रोटीन), ईको जैसे टेस्ट से पता चलता है कि यह एमआइएस-सी है। यदि समय से बीमारी का पता लग जाए, तो बच्चा ठीक हो सकता है।

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