Meri Fasal Mera Byora: खरीद से पहले किसानों को झटका, वेरिफिकेशन में काट दिया धान का रकबा

हरियाणा में मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर डाटा के वेरिफिकेशन ने किसानों की नींद उड़ा दी है। वेरिफिकेशन में धान के रकबे को ही गायब कर दिया। अब पीड़ित किसान ने प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं।

Rajesh KumarSun, 19 Sep 2021 04:38 PM (IST)
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल से धान का रकबा गायब होने से किसान परेशान।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दिए ब्योरे की वेरिफिकेशन ने किसानों की नींद उड़ा दी है। एक ओर जहां पककर तैयार है और मंडियों में आवक शुरू हो गई वहीं वेरिफिकेशन में धान के रकबे को ही गायब कर दिया। अब पीड़ित किसान ने प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने पोर्टल पर धान की फसल का सही ब्योरा दिया था, लेकिन अब उसकी वेरिफिकेशन की जा रही है। जिसके चलते पोर्टल पर धान का एरिया कम दिखाया जा रहा है। ऐसे में उनको धान की फसल बेचने में दिक्कत आएगी। बता दें कि उन किसानों की फसल मंडी में नहीं खरीदी जाएगी जिनका ब्यौरा पोर्टल पर नहीं है।

ढाई एकड़ गायब

कश्मीर गड़ के किसान मोंटी कांबोज ने बताया कि मैने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर साढे तीन एकड़ का रजिस्ट्रेशन करवाया था। अब एक एकड़ ही का वैरिफाई हुई है। बाकी ढाई एकड़ रह गए है। कभी पटवारी तो कभी एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। पटवारी फोन तक उठाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। खेतों फसल पककर तैयार है। कुछ दिन बाद कटाई शुरू हो जाएगी। यदि समाधान न हुआ तो फसल बेचने में दिक्कत आएगी।

मुनीश कुमार, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन। 

कई किसान कर चुके शिकायत

आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मुनीश कुमार ने बताया कि जगाधरी के प्रमोद गर्ग, बूड़िया के विक्रमजीत सिंह, बूड़िया से ही चरणपाल कौर, टापू से प्रवीण कुमार, भूखड़ी से इश्वर दयाल, कैल से राहुल, भंभौल से पवित्र सिंह की भी यही शिकायत है। धान की फसल का जो ब्यौरा पोर्ट पर दिया गया था, उसमें कटौती कर दी गई है। किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। किसी के दो एकड़ कम दिखा दिए तो किसी के चार। अब ऐसे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। इनको फसल बेचने की चिंता सता रही है।

जो डाटा मिसमैच है उसे वेरिफाई किया जा रहा है

यमुनानगर डीसी पार्थ गुप्ता ने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दिए गए ब्यौरे की जांच अलग-अलग एजेंसियों के स्तर पर हुई है। जो डाटा मिसमैच है, उसे वेरिफाई किया जा रहा है। यदि पोर्टल किसी किसान का डाटा गलत दिखा रहा है, तो जांच करवाई जाएगी।

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