Fraud In Yamunanagar: डिपो होल्डरों के कई इलेक्ट्रानिक कांटों में मिली गड़बड़ी, राशन वितरण में हो रही हेराफेरी

यमुनानगर में कई डिपो होल्डर राशन वितरण में हेराफेरी करने के लिए इलेक्ट्रानिक कांटों में गड़बड़ी कर रहे हैं। यमुनानगर अंबाला पंचकूला व हिसार जिलों में करीब डेढ़ साल पहले सभी सरकारी डिपो पर इलेक्ट्रानिक कांटे दिए गए थे।

Naveen DalalTue, 21 Sep 2021 01:48 PM (IST)
यमुनानगर में कई डिपो होल्डर के इलेक्ट्रानिक कांटों में मिली गड़बड़ी।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। यमुनानगर में कई डिपो होल्डर राशन वितरण में हेराफेरी करने के लिए इलेक्ट्रानिक कांटों में गड़बड़ी कर रहे हैं। इलेक्ट्रानिक कांटे डिपो पर आए अभी डेढ़ साल ही हुआ है और यह खराब होने शुरू हो गए। ठीक करने आए मैकेनिकों का कहना है कि कांटों से छेड़छाड़ की गई है जिस कारण बार- बार खराब हो रहे हैं। इलेक्ट्रानिक कांटे सालों तक खराब नहीं होते। यही वजह है कि पीओएस मशीन की बजाय डिपो होल्डर हमेशा मेन्युअल तरीके से राशन देने की मांग करते आ रहे हैं।

चार जिलों में दिए गए थे कांटे

यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला व हिसार जिलों में करीब डेढ़ साल पहले सभी सरकारी डिपो पर इलेक्ट्रानिक कांटे दिए गए थे। यमुनानगर में 594 डिपो पर कांटे भेजे गए थे। कांटे की क्षमता 60 किलोग्राम है। कांटे इसलिए दिए गए थे ताकि डिपो से जो खुला राशन जैसे चीनी, दाल, गेहूं आदि दिया जाता है। पीओएस से जोड़कर सामान की तुलाई की जा सके। कांटे आने पर हेराफेरी पर लगाम कसी गई। पहले डिपो होल्डरों ने खुद के कांटे से तुलाई कर रहे थे।

खुद रख लेते हैं लोगों का राशन 

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने पहले से ही पीओएस मशीन डिपो पर दी हुई है। जिसमें उपभोक्ता व डिपो होल्डर की अंगूली स्कैन होती है। फिर राशन मिलता है। इलेक्ट्रानिक कांटों की तार को पीओएस मशीन से जोड़ा जाता है। कांटे पर जो भी सामान जितनी मात्रा में तुलेगा उसकी पीओएस मशीन से पर्ची निकलेगी। यह रिकार्ड उपभोक्ता के खाते में भी जुड़ता रहेगा। यही कुछ डिपो होल्डरों को रास नहीं आ रहा। इसलिए कांटे को खराब किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ता को उसके हिस्से का राशन पूरा न देकर कम दिया जा सके।

कई कांटों में मिली गड़बड़ी

विभाग ने कई डिपो होल्डरों पर लोगों को राशन नहीं देने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि कांटा खराब है। गारंटी में होने के कारण इन्हें ठीक करने मैकेनिक बुलाए गए। परंतु कुछ दिन बाद ही डिपो होल्डर इनके दोबारा खराब होने की शिकायत करने लगे। जांच में डिपो होल्डरों द्वारा की गई गड़बड़ी सामने आई। जिस पर अधिकारियों ने उन्हें चेतावनी दी।

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