Mahashivratri 2021: महाशिव और सिद्धयोग में मनेगा महाशिवरात्रि का पावन पर्व, इस समय तक रहेगा ये योग

11 मार्च को माहशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

Mahashivratri 2021 महाशिवरात्रि 11 मार्च को है। वीरवार को महाशिव और सिद्धयोग में महाशिवरात्रि है। यह योग काफी महत्‍वपूर्ण है। हालांकि काफी कम समय के लिए यह योग बन रहा है। जानिए महाशिवरात्रि के दिन इस योग से क्‍या मिलेगा लाभ।

Anurag ShuklaSat, 06 Mar 2021 08:03 PM (IST)

कुरुक्षेत्र, जेएनएन। Mahashivratri 2021: इस बार महाशिवरात्रि पर महाशिव और सिद्धयोग एक साथ होगा। यह योग सुबह 9:22 बजे तक रहेगा। महाशिव योग को स्वयं भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त है। इस योग में कोई भी धर्म-कर्म मांगलिक अनुष्ठान कार्य करने से संकल्पित कार्य कभी भी बाधित नहीं होगा। उसका कार्य का सुपरिणाम कभी निष्फल नहीं रहेगा। इस योग के किए गए शुभ कर्मों का फल अक्षुण रहता है। सिद्ध योग में भी सभी कार्य सिद्धि को प्राप्त होते हैं।

गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र कुरुक्षेत्र के संचालक डा. रामराज कौशिक ने बताया कि इन योगों में रुद्राभिषेक, शिव नाम कीर्तन, शिवपुराण का पाठ शिव कथा, दान पुण्य और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना अतिशुभ माना गया है। कन्याओं को इस दिन व्रत करने से मनोनुकूल पति की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों का वैधव्य दोष भी नष्ट हो जाता है। धन चाहने वाले को धन मिलता है, मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष मिलता है और अकाल मृत्यु से रक्षा रहती है।

महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि - 11 मार्च (वीरवार)

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च दोपहर 2:39 बजे।

चतुर्थी तिथि समाप्त:  12 मार्च दोपहर 3:02 मिनट तक।

शिवरात्रि पारण समय : 12 मार्च को सुबह 6:34 से दोपहर बाद 3:02 बजे तक।

महाशिवरात्रि की पूजन विधि

महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।

सबसे पहले तांबे के एक लोटे में गंगाजल लें। अगर ज्यादा गंगाजल न हो तो सादे पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं। लोटे में चावल और सफेद चंदन मिलाएं और ओम नम: शिवाय बोलते हुए शिवङ्क्षलग पर जल अर्पति करें। इसके बाद चावल, बेलपत्र, सुगंधित पुष्प, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्चा दूध, गन्ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, मौली, जनेऊ और पंच मिष्ठान एक-एक कर चढ़ाएं। अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम् मंत्र का उच्चारण करते हुए शमी के पत्ते चढ़ाएं। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें।

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