संशोधित---बेटे से मिलने मध्यप्रदेश से आई थी, बर्तन खरीदने गई तो भटक गई..सागर पुलिस ने पता लगाया

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिला रेडक्रास सोसाइटी बिल्डिग में खोला गया वन स्टाप (सखी) सेंटर अस्थाई आश्रयालय के साथ मददगार बना हुआ है। सोमवार को दो महिलाओं को उनके घर पहुंचाया गया।

JagranTue, 15 Jun 2021 07:06 AM (IST)
संशोधित---बेटे से मिलने मध्यप्रदेश से आई थी, बर्तन खरीदने गई तो भटक गई..सागर पुलिस ने पता लगाया

जागरण संवाददाता, पानीपत : सागर (मध्यप्रदेश) के मोतीनगर की 55 वर्षीय भागवती यहां पानीपत में अपने बेटे के पास आई थी। घर से बर्तन लेने निकली, रास्ता भटक गई। उसे पुलिस ने रेडक्रास सोसाइटी के सखी सेंटर में ठहराया। नाम और पता ठीक से नहीं बता पा रही थी। किसी तरह मध्यप्रदेश का अपना पता और पति का नाम बताया। मध्यप्रदेश पुलिस से मदद ली गई। सागर जिले की पुलिस महिला के पति से मिली, वहीं से बेटे का नंबर मिला। सोमवार को बेटा सखी सेंटर पहुंचा और मां को ले गया। बेटे के गले लगकर काफी देर तक रोती रही मां।

सेटर की प्रबंधक ईशा ने बताया कि 55 साल की महिला मूल रूप से मध्यप्रदेश के जिला सागर के मोतीनगर की निवासी है। बेटा पुलिस लाइन, पानीपत के पास किराए के घर में रहकर मजदूरी करता है। करीब दस दिन पहले ही वह बेटे के पास आई थी। सात जून को वह बर्तन खरीदने के लिए घर से निकली थी, रास्ता भटक गई। सेक्टर 11-12 पुलिस को लावारिस घूमती मिली तो उसे सखी सेंटर लाया गया। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी भी दर्ज कर ली।

महिला बदहवास हो गई थी और नाम-पता भी ठीक से नहीं बता सकी थी। काउंसलिग में मूल पता और पति का नाम बताया। मध्यप्रदेश पुलिस से मदद ली गई। पुलिस उसके पति से मिली, बेटे का मोबाइल फोन नंबर लिया। सोमवार को बेटा, मां को लेने आया तो वह उसके गले लगकर काफी देर तक रोती रही। ससुराल पक्ष से झगड़कर आई थी महिला

करनाल के गांव की 35 वर्षीय महिला ससुराल पक्ष से लड़कर एक सप्ताह पहले घर से निकल गई थी। वह आटो में बैठकर पानीपत पहुंची। यहां से ट्रेन में बैठकर दिल्ली तो कभी करनाल के चक्कर लगाती रही। 12 जून को रेलवे स्टेशन पर घूमते हुए पुलिस ने उसे पकड़ा और सखी सेंटर पहुंचा दिया। गांव के सरपंच की मदद से महिला के पति, देवर से संपर्क किया गया। पति को बुलवाकर महिला को उसके सुपुर्द कर दिया। स्वजनों ने दर्ज नहीं कराई गुमशुदगी

दोनों महिलाओं के केस में एक बात समान है कि स्वजनों ने इनकी गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। इसी कारण सात-आठ दिन इन्हें घर से बाहर रहना पड़ा। गुमशुदगी दर्ज होती तो दोनों को घर पहुंचाना पुलिस के लिए आसान हो जाता। बता दें कि इस साल 20 से अधिक महिलाओं को सखी सेंटर से उनके घर भेजा जा चुका है।

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