समाज में बड़े बदलाव के लिए कंडेला खाप की नई पहल, बेटियों को दी नई उड़ान

कंडेला खाप ने बदलाव की ओर कदम बढ़ाते हुए एक नई पहल शुरू की है। कंडेला खाप ने शिक्षा प्रतियोगिता कराकर टापर छात्राओं को सम्‍मानित किया गया। 12 बच्चों में से 10 छात्रओं को खाप के चबूतरे पर किया प्रोत्साहित।

Anurag ShuklaThu, 16 Sep 2021 04:12 PM (IST)
छात्रओं को सम्मानित करते मुख्य अतिथि एसडीएम डा. राजेश कोथ व खाप के प्रधान ओमप्रकाश व अन्य।

जींद, जागरण संवाददाता। खापों को तुगलकी फरमान सुनाने के लिए बदनाम किया जा चुका है। लेकिन अब खापें समाज में बड़े बदलाव लाने वाले काम कर रही हैं। जींद जिले की कंडेला खाप ने बच्चों के भविष्य को मजबूत करने के लिए नई पहल की है। कंडेला खाप ने 10वीं और 12वीं कक्षा के अंग्रेजी विषय की प्रतियोगिता का आयोजन कराया, जिसमें कुल 12 बच्चों ने स्थान हासिल किया है। 12 में से 10 छात्रओं ने प्रतियोगिता में बाजी मारी है। बच्चों के साथ स्थान हासिल करने वालों बच्चों के अध्यापकों को भी सम्मानित किया है।

खाप नेताओं ने एसडीएम राजेश कोथ, जिला शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा और परिजनों की मौजूदगी में बच्चों को सम्मानित किया। खाप प्रधान ओम प्रकाश कंडेला का कहना है कि लाकडाउन के कारण पिछले करीब दो साल से बच्चे पढ़ाई में पिछड़ रहे थे। इसीलिए बच्चों के विकास के लिए कदम उठाया गया है। अब खाप बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए खाप पंचायत काम करेगी। खाप के प्रवक्ता जगत सिंह रेढू ने कहा कि खाप पंचायत इस मैसेज को प्रदेश भर में प्रचारित करेगी ताकि और लोग भी इस तरह के कार्यक्रम से प्रेरणा ले सकें। खापें अब समाजिक बदलाव के लिए काम करेगी। खाप शिक्षा और खेल प्रतियोगिता पर अब अपना ध्यान केंद्रित करेगी।

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लेने वाले को 1500 रुपए व स्मृति पत्र, द्वितीय को 1100 रुपये व स्मृति पत्र और तृतीय स्थान वालों को 1000 रुपए व स्मृति पत्र दिया गया। खाप के महासचिव राज सिंह कंडेला ने बताया कि जो काम सरकार को करना चाहिए था, वो काम अब खाप पंचायत को करना पड़ रहा है। कोरोना से बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है। खाप ने किसान आंदोलन को भी मजबूत किया है, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए काम करेंगे।

कोथ ने बच्चों को दिया तीन-डी का फार्मूला

उचाना कलां के एसडीएम राजेश कोथ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम में शिरकत करके उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। कंडेल खाप की तरह दूसरी खाप पंचायतें भी ऐसे आयोजन करने के लिए आगे आएं। उन्होंने बच्चों को तीन-डी फार्मूला का दिया। पहला बच्चे डायरी लिखने की आदत डालें, जिससे उनके जीवन में कोई अच्छी या अनुभव वाली घटना या बदलाव लाने वाली कोई बात को नोट करके रखी जाए। दूसरा डिसिप्लीन यानी अनुशाशन। जिस प्रकार सूर्य के अस्त और उदय होने का समय तय है, उसी प्रकार बच्चों को अपना टाइम टेबल तय रखना चाहिए। तीसरा डी डिग्निटी आफ लेबर यानी किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि हर काम एक अहमियत होती है।

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