Kaithal News: कैथल के इस इंडोर स्टेडियम में सीखाए जा रहे पहलवानी के गुर, ये है खासियत

कैथल में जब प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ था तो वहां मात्र पांच खिलाड़ी ही अभ्यास के लिए आते थे। कुश्ती प्रशिक्षक विजय चौहान ने अपने स्तर पर खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया। शहर के निजी और राजकीय स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को जागरूक किया।

Rajesh KumarTue, 28 Sep 2021 04:53 PM (IST)
कैथल के प्रशिक्षण केंद्र में कुश्ती का अभ्यास करते खिलाड़ी।

जागरण संवाददाता, कैथल। अंबाला रोड स्थित इंडोर खेल स्टेडियम में करीब दो साल पहले कुश्ती का प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया था। इससे पहले यह प्रशिक्षण केंद्र पट्टी अफगान स्थित गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम में शुरू किया गया था। स्टेडियम शहर से दूर होने के कारण वहां खिलाड़ी नहीं पहुंचते थे।। उसके बाद इंडोर स्टेडियम में प्रशिक्षण केंद्र शुरू कर दिया गया। जब प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ था तो वहां मात्र पांच खिलाड़ी ही अभ्यास के लिए आते थे।

कुश्ती प्रशिक्षक विजय चौहान ने अपने स्तर पर खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया। शहर के निजी और राजकीय स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को कुश्ती खेल के प्रति जागरूक किया। शहर के आस-पास की पंचायतों से संपर्क किया और वहां जाकर युवाओं को खेल के फायदे बताए। एक साल कोरोना के कारण संघर्ष करना पड़ा, लेकिन विजय ने हार नहीं मानी। अब मौजूदा समय में प्रशिक्षण केंद्र पर करीब 70 खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। 

छोटे बच्चे ले रहे प्रशिक्षण 

प्रशिक्षण केंद्र की खास बात यह है कि इन 70 बच्चों में से करीब 40 बच्चे आठ से 12 साल के हैं। अगर ये खिलाड़ी चार या पांच साल अच्छा अभ्यास करेंगे तो बेहतर खिलाड़ी बन सकेंगे। करीब 20 खिलाड़ी 12 से 18 साल के हैं और बाकि बड़े खिलाड़ी हैं। इन खिलाड़ियों में 15 लड़कियां भी शामिल हैं। कुश्ती ऐसा खेल है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लेने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कैथल के डीएसपी रविंद्र सिंह का बेटा और बेटी भी यहां कुश्ती का अभ्यास करने के लिए आते हैं। बता दें कि रविंद्र सिंह कुश्ती के खिलाड़ी रहे हैं अौर अर्जुन अवार्ड हासिल कर चुके हैं। 

खिलाड़ियों को दिया खेल का सामान 

कुश्ती प्रशिक्षक विजय चौहान ने बताया कि उनका एक ही लक्ष्य है कि प्रशिक्षण केंद्र पर खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए। उन्हें कुश्ती की अच्छी तकनीक सिखाई जाए ताकि वे प्रदेश और देश के लिए मेडल जीत सकें। प्रशिक्षण केंद्र पर कुछ जरूरतमंद खिलाड़ी भी हैं। उन्हें समय-समय पर खेल का सामान भी दिया जाता है और उनकी खुराक का प्रबंध भी किया जाता है। वे करनाल के रहने वाले हैं। खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित ना हो इसके लिए दो से तीन महीने से अपने घर भी नहीं जाते हैं। सुबह और शाम को तीन-तीन घंटे खिलाड़ियों को अभ्यास करवाया जाता है।

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