फसल अवशेष प्रबंधन के तहत कैथल के किसान का कमाल, पराली से हो रहे मालामाल

कैथल के गुहला खंड के गांव रिवाड़ के जागीर निवासी रामकुमार फसल अवशेष प्रबंधन के जरिए लाखों कमा रहे है। वर्ष 2012 में केवल एक बेलर मशीन से शुरू किया था कार्य अब 10 मशीनों से बनाई जा रही पराली की गांठे।

Anurag ShuklaWed, 13 Oct 2021 05:31 PM (IST)
फसल अवशेष प्रबंधन के जरिए लाखों कमा रहे।

कैथल, जागरण संवाददाता। फसल अवशेष प्रबंधन के तहत धान की फसल की कटाई के बाद पराली न जलाने से एक तरफ जहां हम पर्यावरण प्रदूषण कम कर सकते हैं। वहीं, इसे हम अपनी आय का सशक्त माध्यम बना सकते हैं। इसी का उदाहरण है गुहला खंड के गांव रिवाड़ जागीर निवासी रामकुमार वाल्मीकि। रामकुमार किसान नहीं है, लेकिन उसके बावजूद वह फसल अवशेष प्रबंधन के तहत लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। धान के सीजन में रामकुमार खेतों में से पराली को बेलर के माध्यम से एकत्रित कर डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं।

वर्ष 2012 में शुरू किया कार्य

रामकुमार बताते हैं कि वर्ष 2012 में प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता था। उस समय पंजाब सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के तहत बेलर की मशीनें दी जाती थी। उस दौरान ही वह बेलर मशीन वहां से लेकर आया और पराली को खेतों से एकत्रित करने का कार्य किया। उस समय वह पराली का गत्ता मिल में बेचकर आया करता था। जैसे ही समय बदला तो उसने अपने कार्य को और अधिक बढ़ाया। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन का कार्य किया था।

शुरूआत में केवल एक ही बेलर मशीन थी, अब 10 बेलर हैं। शुरूआत में केवल एक बेलर मशीन और ट्रैक्टर-ट्राली के साथ ही अपना कार्य करता था। उस समय सहायता के लिए न तो कोई मजदूर लगाया गया था और न ही अन्य कोई सहयोगी। वह अकेला ही कार्य करता था। जिसका नतीजा यह रहा कि वह अब पराली के माध्यम से अपना अच्छा कारोबार कर रहा है। रामकुमार ने बताया कि वह हर सीजन में खर्चा निकालने के बाद 40 से 50 लाख रुपये कमा लेते हैं। यही नहीं, इस कार्य के तहत 300 लोगों को रोजगार दिया गया है। उसने बताया कि उन्होंने तीन मशीनें कृषि विभाग की सब्सिडी के तहत मशीनें ली गई हैं। पराली को कांगथली और पिहोवा स्थित बिजली बनाने वाली कंपनी को बेचते हैं।

पराली को पर्यावरण संरक्षण के साथ आय का माध्यम बनाएं किसान

रामकुमार ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें अधिक जद्दोजहद करने की जरूरत नहीं है। हम केवल धान के फसली सीजन के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपनाकर अपनी आबो-हवा को साफ सुथरा रख सकते हैं। इसलिए किसानों को पराली को पर्यावरण संरक्षण के साथ आय का माध्यम बनाना चाहिए। इससे किसान अच्छी आमदनी कर सकता है।

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