Jind Accident: शादी को हुए थे 23 महीने, बेटे के पहले जन्मदिन पर सांड ने ली पिता की जान

जींद में एक दर्दनाक हादसे के कारण हंसते खेलते परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। जवान बेटे की शादी को अभी 23 महीने ही हुए थे। बेटे का पहला जन्मदिन था लेकिन उस जन्मदिन को मनाने के लिए पिता नरवीन घर नहीं पहुंच सका।

Rajesh KumarSun, 28 Nov 2021 03:54 PM (IST)
जींद में सांड के हमले से हुई नरवीन की मौत।

जींद, जागरण संवाददाता। जींद में सांडों ने जमकर तांडव मचा रखा है। उपद्रवी सांड दिनभर कालोनियों में घूमते रहते हैं और आपस में भी भिड़ते रहते हैं। सांडों की इस भिड़ंत में अब तक शहर में कई लोगों की जान जा चुकी है। ताजा मामला गोहाना रोड स्थित भारत नगर का है, जहां के 26 वर्षीय युवक की उपद्रवी सांड ने जान ले ली।

सांड ने मारी टक्कर

गांव निडाना के जुड़वां भाई नरवीन व प्रवीन अपनी मां के साथ गोहाना रोड पर भारत नगर में रहते हैं। पिता की छह साल पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। दोनों भाइयों ने मेहनत से शहर में मकान बनाया। प्रवीन निजी अस्पताल में नौकरी करता है, जबकि नरवीन ने दो महीने पहले ही भैंसों की डेयरी शुरू की थी। दो साल पहले ही दोनों भाइयों की शादी हुई थी। कुछ दिन पहले नरवीन मलिक शाम के समय दूध देकर बाइक से घर आ रहा था। गोहाना रोड बाइपास पर कृष्णा कालोनी से गुजर रहा था तो उपद्रवी सांड ने सीधी छाती में टक्कर दे मारी। सांड की टक्कर लगते ही नरवीन नीचे गिर पड़ा। इसके बाद सांड ने उसकी छाती पर पैर भी रखा और दो टक्कर फिर मारी। इससे नरवीन का अंदर से लीवर फट गया और कई पसलियां टूट गईं। तभी एक महिला भाग कर आई और उसने सांड को भगाया। तब गर्म खून में नरवीन बाइक लेकर वहां से निकल गया।

अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम

थोड़ी दूर चलते ही जेल पुल के पास विकलांग गोशाला के नजदीक उसकी हालत खराब हो गई और बाइक से उतरकर जमीन पर लेट गया। तब भाई को फोन किया कि सांड ने टक्कर मार दी है, जल्दी आकर अस्पताल ले चलो। भाई प्रवीन ने बताया कि जब वह भाई के पास पहुंचा तो वह पसीने से तर-बतर था। वह तुरंत उसे उठाकर डाक्टर के पास लेकर गया। तब नरवीन कह रहा था कि उसकी छाती फट रही है। ग्लूकोज लगाते ही कहा कि पेट भारी हो गया है। तभी डाक्टरों को लगा कि अंदर ब्लीडिंग शुरू हो चुकी है। तुरंत उसे एंबुलेंस में रखकर हिसार की तरफ रवाना हुए तो हांसी के पास जाते ही दम तोड़ दिया।

बेटे नरवीन की मौत के बाद मां मुन्नी देवी के नहीं रुक रहे हैं आंसू।

रोते हुए मां ने बताया: बेटा कहता रहा, मुझे बचा लो, मुझे बचा लो

मां मुन्नी देवी ने रोते हुए बताया कि जब उसका फोन आया कि सांड ने टक्कर मार दी है और विकलांग गोशाला के पास हूं, तब उसने पूछा था कि बेटा कितनी चोट लगी है। बेटे ने कहा कि मां थोड़ी सी सिर में चोट लगी है, दवाई लेकर घर आ जाउंगा। जुड़वां भाई उसे निजी अस्पताल में लेकर गया और पीछे वह अपनी बेटी व बहू के साथ अस्पताल पहुंची तो उसने आंखें बंद की हुई थी। वह पूछती रही, बेटा कहां दर्द हो रहा है। तब वह हां मां, हां मां बोलता रहा। उसने आंखें नहीं खोली और दर्द से कराहता रहा। उसे एंबुलेंस में लेटाकर हिसार की तरफ चले तो रास्ते में भी यही कहता रहा कि मुझे बचा लो, मुझे बचा लो। मां, भाई, बहन सारे उसके साथ थे, लेकिन कोई नहीं बचा सका। यह कहते हुए मां की आंखों से कई बार आंसुओं की धारा बहती रही। मां मुन्नी देवी व भाई नरवीन की आंखों से आंसू नहीं सूख रहे हैं।

मेडिकल सुविधाओं की कमी फिर अखरी

सांड की टक्कर से जान गंवाने वाले नरवीन की मां ने बताया कि बेटे की अंदर से पसलियां टूट गई थी। लेकिन जींद शहर में कोई ऐसा स्पेशलिस्ट अस्पताल नहीं मिला, जो इसका इलाज कर सके। बेटे को दो निजी अस्पतालों में लेकर गए, दोनों ने हिसार के लिए रेफर कर दिया। प्रदेश सरकार को सरकारी अस्पतालों में सभी तरह के बड़े आपरेशनों की सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए ताकि इलाज के अभाव में लोगों की मौत न हो।

प्रशासन बना निर्दयी, हत्या का केस दर्ज हो

जिला बार के पूर्व प्रधान एडवोकेट बलराज श्योराण ने कहा कि नगर परिषद निर्दयी बना हुआ है। पूरे शहर में बड़ी संख्या में सांड खुलेआम घूम रहे हैं। न तो इन्हें गोशालाओं में छोड़ा जा रहा है और न गोशालाओं को चारे की राशि दी जा रही है। शहर को सांडों से मुक्त रखना प्रशासन और नगर परिषद की जिम्मेदारी है। शहर में सांडों के कारण जितनी भी माैतें हुई हैं, इनका जिम्मेदार नगर परिषद और जिला प्रशासन है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए। डीसी भी इस मामले में कतई गंभीर नहीं है। वह भी चार महीने से कोरी बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन शहर को सांड मुक्त करने के लिए एक कदम नहीं उठाया।

सांसद रमेश कौशिक गायब, उनकी तलाश करेंगे: सुनील वशिष्ठ

शहर के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे सुनील वशिष्ठ ने कहा कि सांसद रमेश कौशिक लंबे समय से गायब चल रहे हैं। जींद जिले की जनता ने उनको बड़ी जीत देकर लोकसभा में भेजा था। लेकिन वह जींद जिले की जनता को भूल गए हैं। सिर्फ चुनाव के समय या मुख्यमंत्री के जींद में दौरे के समय ही उनके दर्शन होते हैं। सांसद रमेश कौशिक को ढूंढ़ने के लिए जल्द तलाशी अभियान चलाएंगे। वह सोनीपत या दिल्ली में कहीं मिले तो उनसे जींद की समस्याओं के बारे में सवाल जवाब करेंगे। सुनील वशिष्ठ ने कहा कि जींद की समस्याओं के प्रति सांसद कतई गंभीर हैं, जबकि जींद, जुलाना व सफीदों से उनको बड़ी लीड मिली थी।

नगर परिषद के पास चारे का फंड नहीं

जींद के जिला नगर आयुक्त मेजर गायत्री अहलावत ने बताया कि नगर परिषद के पास चारे का कोई फंड नहीं है। इसलिए गोशालाओं को कोई मदद नहीं दे सकते। गोसेवा आयोग ही चारे की राशि उपलब्ध कराता है या नंदीशाला का संचालन कर रहे लोग इस बारे में व्यवस्था करें। सांडों को पकड़ने के लिए नगर परिषद ने टेंडर दिया हुआ है।

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