कई बार हार्ट अटैक आया, स्टेंट नहीं डलवाया, योग-प्राणायाम से मिला यमुनानगर के हुकम चंद को नया जीवन

यमुनानगर के 69 वर्ष के हुकम चंद रोज सुबह योग करते हैं। दूसरों को भी योग के फायदे गिनाते हैं। 2007 में उन्हें हार्ट अटैक आया था। डॉक्टर ने स्टेंट डलवाने की सलाह दी थी। एक जानकार ने योग करने को कहा। फायदा मिला तो योग को दिनचर्या बना लिया।

Umesh KdhyaniSun, 20 Jun 2021 03:40 PM (IST)
यमुनानगर में योग प्राणायाम करते बुजुर्ग हुकम सिंह।

यमुनानगर, जेएनएन। इनसे मिलिए। ये बुजुर्ग हुकम चंद आर्य रादौर के अलाहर गांव से हैं। उम्र करीब 69 वर्ष है। तंदुरुस्ती युवाओं के जैसी बरकरार है। बताते हैं कि 10 से ज्यादा बार हार्ट अटैक आया। एक बार तो ऐसा लगा कि शायद अब सांसें कुछ ही दिन की हैं। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। योग-प्राणायाम ने सांसों में जान डाल दी। न स्टेंट डलवाने की जरूरत पड़ी और न ही अधिक दवाइयों का सेवन करना पड़ा। शुगर लेवल 500 पार रहता था, जो अब सामान्य है। यह सब केवल योग व प्राणायाम की बदौलत। कहते हैं कि वह हर दिन करीब एक हजार बार कपालभाति करते हैं। साथ में अनुलोम-विलोम करना एक भी दिन नहीं भूलते।

2007 में बिगड़ गई थी तबीयत

हुकम चंद आर्य ने बताया कि वह खेतीबाड़ी का काम करते हैं। वर्ष 2007 में पहली बार अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। बाजू व छाती व कमर में दर्द की शिकायत हुई। खूब पसीना आया और शरीर जवाब देने लगा। चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। सुनकर एक बार तो चिंता हुई। परामर्श के लिए पीजीआइ चंडीगढ़ गए। वहां चिकित्सकों ने स्टेंट डलवाने की सलाह दी। यहां तक कहा कि यदि जल्द स्टेंट नहीं डलवाया तो कुछ भी हो सकता है। उस दिन उसके पास पैसे नहीं थे। घर आकर पैसे का बंदोबस्त किया, लेकिन एक रिश्तेदार ने उनको योग-प्राणायाम करने की सलाह दी। हरिद्वार जाकर उन्होंने तीन बार बाबा रामदेव का शिविर अटेंड किया। काफी राहत मिली। बस उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। योग-प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया।

अब दूसरों को भी सिखा रहे

हुकम चंद नियमित रूप से योग शिविर लगाते हैं। खुद भी करते हैं और दूसरों को सिखाते हैं। उन्होंने बताया कि गांव के मंदिर परिसर में अन्य बुजुर्गों के साथ मिलकर कम से कम एक घंटा हर दिन योग-प्राणायाम करते हैं। इन दिनों जठलाना में शिविर लगाकर योग सिखा रहे हैं। उनका कहना है कि योग-प्राणायाम बेहतर स्वास्थ्य का आधार है। इनसे हम असाध्य बीमारियों का उपचार कर सकते हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन में यह और भी जरूरी हो गया है। सुबह सूरज निकलने से पहले हर दिन कम से कम एक घंटा योग-प्राणायाम अवश्य करें।

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