यहां 50 साल पुराना कानून हो रहा फॉलो, यमुनानगर में बह रही नहर, देखरेख करनाल के जिम्‍मे

यमुनानगर नहर की देखरेख की जिम्‍मेदारी करनाल को।

50 साल पुराना कानून यमुनानगर के लोगों के लिए मुसीबत बना है। यमुनानगर में बहने वाली नहर की देखरेख की जिम्‍मेदारी करनाल के सिंचाई विभाग को है। मरम्मत व पानी उतरवाने को लेकर करनाल में चक्‍कर लगाने पड़ते हैं।

Publish Date:Thu, 21 Jan 2021 09:10 AM (IST) Author: Anurag Shukla

पानीपत/यमुनानगर, जेएनएन। आवर्धन नहर बेशक यमुनानगर के एरिया में बह रही हो, लेकिन देखरेख का जिम्मा आज भी करनाल के सिंचाई विभाग पर है। मरम्मत व पानी उतरवाने को लेकर विभाग की पॉलिसी आज भी वही है जो खोदाई के समय थी। दक्षिण हरियाणा में पानी पहुंचाने के लिए 1970 के दशक में नहर की चालू हुई थी। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि करनाल की सीमा तक इस नहर की लंबाई करीब 18 किलोमीटर है। हमीदा हेड से अलग होकर यह दक्षिण हरियाणा को पानी पहुंचा रही है।

यह आ रही दिक्कत

नहर की मरम्मत दो जिलों के बीच उलझकर रह गई है। नहर की जांच के लिए करनाल से अधिकारी कभी दिखाई नहीं देते। अब हालात यह हैं कि नहर के किनारे जर्जर हो चुके हैं। कब कहां से पानी की धार के साथ बह जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। आपात स्थिति में पानी उतरवाने के लिए भी करनाल की संपर्क करना पड़ता है। यहां के अधिकारियों से यदि संपर्क किया जाए तो यही जवाब मिलता है कि करनाल संपर्क करो।

कई बार टूट चुकी पटरी

आवर्धन नहर की क्षमता तीन हजार क्यूसेक है। बारिश के दिनों में कई बार जल स्तर बढ़ जाता है। किनारे कई जगह से टूटे हुए हैं। मिट्टी के कट्टों से पानी का बहाव रोका हुआ है। हालांकि गत वर्ष इसकी मरम्मत हुई थी। बावजूद इसके किनारों के यह हालात हैं। ¨सचाई विभाग की यह लापरवाही क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन सकती है।पहले किनारे बह जाने के करण सैकड़ों एकड़ फसल तबाह हो चुकी है।

सीएम को लिखेंगे पत्र

भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री रामबीर सिंह चौहान, प्रताप सिंह खजूरी व विकास राणा का कहना है कि इस नहर की देखरेख का जिम्मा यमुनानगर सिंचाई विभाग को सौंपना चाहिए। गर्मियों के दिनों में डूबने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसके अलावा किनारे टूटने के कारण भारी नुकसान होता है। इसके लिए सीएम मनोहर लाल को पत्र लिखेंगे।

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