कुरुक्षेत्र में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का फरमान, अब कोविड मरीज दाखिल करने वाले गैर कोविड अस्पतालों की खैर नहीं

कुरुक्षेत्र स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का फैसला, अब कोविड अस्‍पताल में एडमिट किए जाएंगे कोरोना मरीज।

एक निजी गैर कोविड अस्पताल में दो बार आक्सीजन बवाल को लेकर जागा स्वास्थ्य विभाग मुख्यमंत्री की फटकार के बाद अब शुरू किया जांच अभियान। स्टेबल मरीजों को पंजीकृत कोविड अस्पताल में किया जा रहा शिफ्ट जहां ज्यादा मरीज वहां नए कोरोना पॉजिटिव मरीजों को दाखिल करने पर लगाई पाबंदी।

Anurag ShuklaTue, 04 May 2021 09:40 AM (IST)

कुरुक्षेत्र, [विनीश गौड़]। धड़ल्ले से कोरोना पॉजिटिव मरीजों को अपने अस्पताल में दाखिल करने वाले गैर कोविड अस्पतालों की अब खैर नहीं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की फटकार के बाद स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पतालों में खुद दस्तक देकर दाखिल मरीजों का न केवल कोविड-19 टेस्ट करा रहा है बल्कि पहले से यहां दाखिल कोरोना पॉजिटिव स्टेबल मरीजों को पंजीकृत कोविड अस्पतालों में शिफ्ट कराना शुरू कर दिया है। 

ऐसे अस्पतालों को चेतावनी भी दी जा रही है कि अगर दोबारा कोरोना पॉजिटिव मरीजों को यहां दाखिल किया गया तो आक्सीजन खत्म होने या किसी भी तरह की दिक्कत होने पर जिम्मेदारी उस अस्पताल की होगी। ऐसे ही एक अस्पताल से चार कोरोना पॉजिटिव मरीजों को कोविड अस्पताल में शिफ्ट कराया गया। ताकि कोरोना पॉजिटिव मरीजों को आक्सीजन की कमी न हो। 

यह हुआ था अचानक 

दरअसल एक गैर कोविड अस्पताल में दो बार आक्सीजन खत्म होने को लेकर बवाल हो गया था। एक बार खुद निजी अस्पताल संचालक चिकित्सक कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद दो से ढाई घंटे में आॅक्सीजन खत्म होने की बात कहकर डीसी कैंपस में मरीजों के परिजनों के साथ पहुंच गए थे। इसके बाद दोबारा तीन दिन पहले ऐसा ही हुआ और इसी अस्पताल के बाद फिर आक्सीजन कम होने की बात कह दी गई थी। जबकि जिला प्रशासन ने जब उस अस्पताल में जांच कराई गई तो आक्सीजन ढाई घंटे नहीं बल्कि आठ से नौ घंटे की मिली। ऐसा करने वाले चिकित्सक के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई भी की। 

मुख्यमंत्री ने लगाई थी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को कड़ी फटकार

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को कुरुक्षेत्र के दौरे के दौरान साफ तौर पर कहा था कि जिन निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं और नियमों पर खरा उतरता हैं उनकों प्रशासन पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाकर मरीजों का इलाज करने की अनुमति प्रदान करें। लेकिन जिन अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं और मापदंड पूरा नहीं करता उन अस्पतालों को इलाज करने की अनुमति ना दी जाए। उन्होंने यह भी आदेश दिए कि जिला स्तर पर गठित टीमें नियमित रूप से अस्पतालों में जाकर ऑक्सीजन, बेड और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को ऑडिट कर सरकार को रिपोर्ट भेजना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा था कि कोरोना काल के इस कठिन समय में सभी लोगों का पैसा कमाना उद्देश्य ना होकर सेवा करना उद्देश्य होना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसे समय में पैसा कमाने के लिए दवाएं, सिलेंडर और अन्य पदार्थों की कालाबाजारी करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

 

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