जननी सुरक्षा योजना में रुचि नहीं दिखा रहा विभाग, 10 फीसद तक खर्च नहीं हुआ बजट, लैप्‍स

हरियाणा में जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाला बजट अभी तक खर्च नहीं कर पाएं। आधे से अधिक जिलों में 10 फीसद तक भी नहीं हो पाया खर्च। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की ओर से खर्च न किए जाने से बजट लैप्‍स हो गया।

Anurag ShuklaMon, 26 Jul 2021 01:56 PM (IST)
जननी सुरक्षा योजना का बजट खर्च न कर पाने से लैप्‍स हो गया।

कैथल, जागरण संवाददाता। सरकार के निर्देशों के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त रुप से चलाई गई जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रदेशभर में जिलास्तर पर दिया गया बजट पूरा खर्च नहीं हो पाया है। यह बजट प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में महज 10 से 15 फीसद तक ही खर्च हो गया है। जबकि कैथल जिले में यह 50 फीसद तक खर्च किया जा चुका है। वहीं, इस बजट के खर्च न होने के कारण बची हुई राशि लेप्स भी हो गई है। अब नए सिरे से आने वाले बजट के बाद इस योजना का लाभ गर्भवती व मां बनने के बाद महिला को दिया जाएगा।

बता दें कि जननी सुरक्षा योजना के सरकारी अस्पताल में दाखिल जच्चा-बच्चा की पोषण सुरक्षा के लिए उन्हें खुराक दी जाती है। इसके लिए सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग को यह राशि दी जाती है। परंतु इस बार काेरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण जननी सुरक्षा योजना के तहत दिया गया बजट पूरा नहीं किया जा सका है। लेप्स हुई राशि सरकार के खाते में वापस जा चुकी है।

जिलानुसार यह है खर्च किए गए बजट का ब्यौरा 

जिला दिया गया बजट लाख रुपयाें में खर्च किया गया बजट

सोनीपत 12.41 0.09

पानीपत 11.92 0.11

रेवाड़ी 07.03 0.11

गुरुग्राम्र 15.19 0.24

कुरुक्षेत्र 05.41 0.09

मेवात 28.07 0.64

फरीदाबाद 14.53 0.42

अंबाला 11.31 0.49

जींद 09.09 0.44

रोहतक 16.50 0.86

झज्जर 5.77 0.31

दादरी 2.53 0.17

महेंद्रगढ़ 6.99 0.60

पंचकूला 6.60 0.68

सिरसा 10.93 1.39

भिवानी 7.25 1.04

पलवल 10.80 1.77

यमुनानगर 10.58 1.98

हिसार 13.86 2.58

करनाल 14.97 2.98

फतेहाबाद 7.90 2.27

कैथल 7.42 3.70

कुल 237.07 22.85

'जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकार के आदेशों के तहत गर्भवती महिलाओं के अस्पताल में दाखिल होने के बाद उन्हें खाना दिया जाता है। यह खाना गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी होने के बाद उसके अस्पताल में दाखिल रहने तक दिया जाता है। इस बार इस योजना के तहत मिले बजट में कैथल में तो 50 फीसद तक बजट किया गया है। इसमें कुल करीब साढ़े सात लाख रुपये की राशि आई थी। जिसमें से पौने चार लाख रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है।

डा. शैलेंद्र ममगाईं शैली, सिविल सर्जन, कैथल'

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