डीएपी के बाद अब किसानों को यूरिया खाद की चिंता, सरकारी दुकानों से गायब

हरियाणा में डीएपी की कमी के बाद किसानों को यूरिया खाद की चिंता सताने लगी है। किसानों को डर है कि कहीं समय पर यूरिया नहीं मिली तो गेहूं के उत्‍पादन पर असर पड़ेगा। गेहूं की पहली सिंचाई पर जरूरत पड़ेगी।

Anurag ShuklaThu, 25 Nov 2021 12:13 PM (IST)
हरियाणा में डीएपी संकट के बाद यूरिया को लेकर किसान चिंतित।

जींद, जागरण संवाददाता। गेहूं की बिजाई के लिए किसानों ने डीएपी खाद के लिए काफी परेशानी झेली। इसके लिए घंटों तक लाइन में खड़ा होना पड़ा और सिफारिश तक लगवानी पड़ी। किसानों को डर है कि कहीं डीएपी की तरह यूरिया भी समय पर ना मिले। इसलिए किसान एडवांस में ही यूरिया खरीद कर स्टाक करना चाहते हैं।

बुधवार को सफीदों में जैसे ही किसानों को यूरिया खाद पहुंचने की सूचना मिली। सैकड़ों किसान खाद लेने के लिए पहुंच गए। जिससे अव्यवस्था फैल गई और डीलर को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस ने किसानों को कूपन दिए। उसके बाद कूपन देखकर डीलर ने यूरिया के बैग दिए। डीएपी व यूरिया खाद का वितरण पीओएस (प्वाइंट आफ सेल) मशीन से हाेता है। जिस पर आधार कार्ड नंबर भरकर किसान का अंगूठा लगवा कर खाद दी जाती है।

एक किसान को अधिकतम 10 यूरिया के बैग दिए जाते हैं। सफीदों क्षेत्र में केवल तीन डीलर हैं, जिनमें से एक डीलर का लाइसेंस सस्पेंड है। केवल एक डीलर खाद बांट रहा है। जिसके चलते दिक्कत बढ़ रही हैं। जिले में गेहूं व रबी की अन्य फसल में करीब 76 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। अब तक जिले में करीब 24 हजार मीट्रिक टन यूरिया पहुंच चुका है।

सरकारी दुकानों पर नहीं खाद

इस सीजन में ज्यादातर डीएपी व यूरिया की सप्लाई निजी डीलर्स के पास ही आई है। सरकारी दुकानों पर बहुत कम डीएपी खाद पहुंचा। फिलहाल सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं है। वहीं यूरिया भी बहुत कम मात्रा में है। जिसका निजी डीलर्स फायदा उठाते हैं और खाद के साथ बीज व कीटनाशक दवाइयां किसानों को बेचते हैं। जबकि सरकार के आदेशानुसार कोई भी डीलर खाद के साथ दवाइयां व अन्य सामान खरीदने के लिए किसान को बाध्य नहीं कर सकता है।

पर्याप्त मात्रा में है यूरिया, जरूरत अनुसार खरीदें किसान

कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर नरेंद्र पाल ने बताया कि जिले में यूरिया पर्याप्त मात्रा में है। किसान चिंता ना करें। गेहूं की फसल में पहली व दूसरी सिंचाई के समय यूरिया खाद डाली जाती है। इसलिए एडवांस स्टाक करने की बजाय जरूरत के अनुसार ही किसान खाद खरीदें। फिलहाल जिले में 24 हजार मीट्रिक यूरिया खाद पहुंच चुकी है। जल्द ही यूरिया के और भी रैक पहुंचने वाले हैं।

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