Karnal Kisan Andolan News: लठैतों को गुरनाम चढूनी की नसीहत, जीत के लिए दिया ये मंत्र

करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में चल रहा धरना शनिवार को खत्म हो गया। भाकियू प्रदेश प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने धरनास्थल पर किसानों को संबोधित किया। पुराने आंदोलनों में नुकसान से सीख लेने की नसीहत भी दी।

Umesh KdhyaniSat, 11 Sep 2021 08:43 PM (IST)
करनाल में धरनास्थल पर किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह चढ़ूनी।

सेवा सिंह, करनाल। नेशनल हाईवे स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर 28 अगस्त को हुए लाठीचार्ज प्रकरण के बाद जिला सचिवालय घेरे रहे किसान शनिवार को धरना समाप्त कर रवाना हो गए। मांगें पूरी होने से उनके चेहरे खिल उठे। शुरू से ही उनकी अगुवाई करते रहे किसान नेता गुरनाम चढूनी ने धरनास्थल पर गाड़ी की छत पर खड़े होकर यहां अंतिम बार किसानों को संबोधित किया और धरना सफल बनाने पर आभार जताया।

इससे पहले चढूनी ने पूरे आंदोलन के दौरान घूमते रहे लठैतों को भावनात्मक अपील के साथ कड़ी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि लठों के सहारे आंदोलन सफल नहीं हो सकते। जो आंदोलन खत्म करना चाहते हैं, वे ही लठ लेकर आते हैं। पुलिस लठ मारे या गोली, हम हाथ नहीं उठाएंगे। यही आंदोलन की जीत का मूल मंत्र है। अपील के बावजूद अनेक लोग लठ लेकर पहुंचे तो पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर भी सचिवालय घेराव के दौरान कुछ लोगों ने पत्थर फेंके। ऐसी हरकतों से आंदोलन कमजोर होता है।

इन आंदोलनों से सीख लेने की दी नसीहत

चढ़ूनी ने लठैतों को भजनलाल, बंसीलाल व ओमप्रकाश चौटाला के कार्यकाल के दौरान हुए आंदोलनों में हुए नुकसान से सीख लेने की अपील की और कहा कि आंदोलन जीत होने तक चलाना है तो इतनी कुर्बानी दें कि पूरी दुनिया की आत्मा जाग उठे। आंदोलन में अनुशासन के चलते ही वे लोग भी जुड़े, जो किसान नहीं हैं और सरकार को मांगें माननी पड़ीं।

पांच दिन लठ लिए घूम रहे लोगों की रही चर्चा

चढ़ूनी ने कहा कि युवा,बुजुर्ग व महिलाएं भी पड़ाव में बड़ी संख्या में शामिल हुईं तो उत्साह के साथ लंगर से लेकर अन्य सेवाएं दी गईं। बता दें कि अनाजमंडी में रैली से लेकर जिला सचिवालय पर पांच दिन के पड़ाव में लठ लिए लोग भी घूमते रहे, जो आम लोगों में चर्चा का विषय रहे।

खुले जिला सचिवालय के द्वार

एक ओर किसान नेता चढूनी धरना समाप्ति का ऐलान कर रहे थे तो वहीं पांच दिन से लगातार ड्यूटी दे रहे अर्धसैनिक बल व पुलिस के जवान भी राहत महसूस कर रहे थे। इसी बीच जिला सचिवालय के द्वार खुल गए। फोर्स अधिकारियों के दिशा-निर्देशानुसार वाहनों में सवार होकर रवाना होने लगी। चार घंटे बाद तक भी किसान रवाना होते रहे और कुछ फोर्स जिला सचिवालय के आसपास तैनात रही, लेकिन मुख्य द्वार खुलते ही आम लोग भी सचिवालय पहुंचने लगे। स्थिति सामान्य होने पर आम लोगों ने राहत महसूस की।

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