Fraud: यमुनानगर में फर्जी हस्ताक्षर करवा खाते से निकाले लाखों, इस जांच के बाद हुआ खुलासा

सदर जगाधरी थाना के जांच अधिकारी एएसआइ कंवल सिंह ने बताया कि आरोपित अमन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। वह पहले भी अपराधिक वारदात कर चुका है। चोरी के एक मामले में वह इस समय जेल में बंद है।

Naveen DalalTue, 19 Oct 2021 05:27 PM (IST)
फर्जी साइन कर खाते से निकाले गए दो लाख।

जागरण संवाददाता, यमुनानगर। ठगी का अजीब मामला सामने आया है। विदेश गए भाई संदीप कुमार के यहां चल रहे खाते से छोटे भाई अमन कुमार ने फर्जी हस्ताक्षर दो लाख 45 हजार रुपये निकाल लिए। खाते से पैसे निकलने पर संदीप ने माता मीना देवी से बात की, तो पता लगा कि उन्होंने काेई पैसा नहीं निकलवाया। जिस पर उन्होंने बैंक मैनेजर से इस संबंध में शिकायत की। इसके बाद ही बैंक मैनेजर अरूण कुमार ने मामले की जांच कराई और पता लगा कि फर्जी साइन कर पैसे निकाले गए हैं। जिस पर एसपी को शिकायत दी गई।

पुलिस को मिली शिकायत के अनुसार

सदर जगाधरी थाना के जांच अधिकारी एएसआइ कंवल सिंह ने बताया कि आरोपित अमन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। वह पहले भी अपराधिक वारदात कर चुका है। चोरी के एक मामले में वह इस समय जेल में बंद है। 

मामला महलावाली गांव का है। यहां पर पंजाब नेशनल बैंक की शाखा है। जिसमें ब्रांच मैनेजर के पद पर अरुण कुमार तैनात है। यहां पर ही मेहलावाली निवासी संदीप कुमार का बैंक खाता है। वह विदेश में रहता है। उसके खाते की पूरी जानकारी छोटे भाई अमन कुमार के पास भी रहती है। इस खाते से वर्ष 2020 में अलग-अलग कर दो लाख 45 हजार रुपये निकाले गए। जब इस संबंध में मैनेजर अरूण कुमार के शिकायत पहुंची, तो उन्होंने जांच कराई।

मैनेजर अरूण कुमार ने बताया कि अमन कुमार ने फर्जी हस्ताक्षर अपने भाई के खाते से 35 बार में अलग-अलग कर यह पैसा निकाला गया। जिस पर आरोपित व उसके परिवार के लोगों से बात की और उन्हें बैंक में बुलाया। यहां पर आरोपित ने अपनी गलती मानी। इस दौरान गांव के निवर्तमान सरपंच राकेश कुमार व कुछ अन्य ग्रामीण भी थे। यहां पर अमन कुमार ने कानूनी कार्रवाई न करने का अनुरोध किया और एक माह के अंदर यह पैसा जमा कराने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद आरोपित यह पैसा जमा नहीं कराया। 

परिवार ने भी बनाया दबाव

बैंक मैनेजर अरूण कुमार से संदीप कुमार की भी बात हुई, तो उन्होंने पारिवारिक मामला होने का हवाला देकर कोई कार्रवाई न कराने की बात कही थी। जबकि बैंक के साथ धोखाधड़ी की गई थी। फर्जी हस्ताक्षर कर पैसे निकाले गए थे। ऐसे में स्टाफ व मैनेजर पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। इसलिए बैंक मैनेजर ने खाते से निकाला गया पैसा जमा कराने का समय दिया था। जब पैसा जमा नहीं कराया गया, तो उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। वहां से आर्थिक अपराध शाखा ने जांच की।

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