Haryana College Admission: हरियाणा में साढ़े चार लाख बच्चे कालेजों में दाखिला पाने से वंचित, राज्‍यपाल ने सीएम से की बात

हरियाणा के कालेजों में साढ़े चार लाख बच्‍चे कालेज में दाखिले से वंचित हो गए हैं। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष पहुंची दाखिलों से वंचित बच्चों की पीड़ा। कुलपति और कालेज प्राचार्य भी चिंतित। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ चर्चा कर कालेजों में सीटें बढ़ाने का दिलाया भरोसा।

Anurag ShuklaWed, 13 Oct 2021 07:35 PM (IST)
हरियाणा के कालेजों में प्रवेश को लेकर कुलपति और प्राचार्य चिंतित।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के कालेजों में दाखिलों के लिए ऐसे बदतर हालात कभी नहीं हुए, जिस तरह के इस बार बन गए हैं। प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें कालेजों में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह यह है कि प्रदेश के 327 कालेजों में मात्र डेढ़ लाख सीटें हैं, जबकि दाखिला चाहने वाले बच्चों की संख्या छह लाख के आसपास है। साढ़े चार लाख बच्चों को मालूम नहीं कि उन्हें कालेजों में दाखिला मिल भी पाएगा या नहीं।

हरियाणा के तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपति और कालेज प्राचार्यों के हाथ बंधे हुए हैं। उनके पास सीटें नहीं हैं और बच्चों को दाखिले देने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के संज्ञान में यह मामला ला दिया गया है। विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कालेज प्राचार्यों और अभिभावकों के प्रतिनिधि के रूप में शांति सेना के प्रधान संपूर्ण सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात कर साढ़े चार लाख बच्चों को न्याय दिलाने की आवाज बुलंद की। राज्यपाल इस बात से हैरान हैं कि यदि उचित बंदोबस्त नहीं किए गए तो साढ़े चार लाख बच्चे इस बार कालेजों में दाखिले से वंचित रह सकते हैं।

सीएम से की बातचीत

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कालेजों में सीटें बढ़वाने की बात मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बातचीत करने का भरोसा दिलाया है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कालेजों में सीटें बढ़ सकती हैं। ऐसा नहीं होने की स्थिति में हर जिले में विश्वविद्यालयों व कालेजों के बाहर बवाल मचने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

प्रदेश में कालेजों की स्थिति

प्रदेश में 171 सरकारी, 79 सरकारी सहायता प्राप्त और 77 स्वयं वित्त पोषित कालेज हैं। इन कालेजों में बीए की 98 हजार, बीकाम के लिए 24 हजार, बीएससी नान मेडिकल की 21 हजार और बीएससी मेडिकल की साढ़े पांच हजार सीटें हैं। इसके विपरीत बीए में दाखिले के लिए चार लाख 44 हजार 170 बच्चों ने आवेदन किया है। बीकाम प्रथम वर्ष में दाखिला चाहने वाले बच्चों की संख्या 63 हजार 234, बीएससी नान मेडिकल में 20 हजार 493, बीबीए प्रथम वर्ष के लिए 13 हजार 493, बीकाम प्रथम वर्ष (आनर्स) में दाखिले के लिए 10 हजार 94 बच्चों ने आवेदन किया है। बीए प्रथम वर्ष (ईवीई) में दाखिलों के लिए 8300, बीए प्रथम वर्ष अंग्रेजी आनर्स में 5571 और बीएससी मैथ आनर्स में दाखिले के लिए 3714 बच्चों ने आवेदन किया है।

12वीं के सौ फीसद रिजल्ट से बने ऐसे हालात

चार दशक से छात्र व शिक्षक राजनीति में सक्रिय शांति सेना प्रमुख संपूर्ण ङ्क्षसह ने राज्यपाल को अवगत कराया कि 12वीं का रिजल्ट सौ फीसद होने की वजह से ग्रेजुएशन में दाखिलों के लिए बच्चों की संख्या बढ़ी है। ऐसी ही स्थिति 10वीं पास करने वाले बच्चों के सामने हैं, जबकि स्नातक की परीक्षाओं में पास बच्चों का रिजल्ट भी काफी अच्छा रहा है, जिस कारण पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दाखिलों में मारामारी मच रही है। संपूर्ण ङ्क्षसह ने राज्यपाल को बताया कि यदि कालेजों में सीटें नहीं बढ़ाई गई तो जिलों में छात्र आंदोलन खड़े हो सकते हैं। शिक्षा हर किसी बच्चे का मौलिक अधिकार है, जिससे उन्हें वंचित नहीं रखा जा सकता। हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि पीजी कोर्स की करीब 20 फीसद सीटें बढ़ाई जानी चाहिए।

दाखिला बन गया टारगेट, प्रभावित हो रहा रिजल्ट

राज्यपाल को सौंपे एक ज्ञापन में मौजूदा सीटों पर मैरिट के खेल को भी उजागर किया गया। संपूर्ण ङ्क्षसह ने राज्यपाल को बताया कि हर बच्चे को मैरिट में आने का तरीका नहीं पता। अमूमन बच्चे वही सब्जेक्ट आवेदन फार्म में भरते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत होती है। कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जिन्हें यह पता है कि किन सब्जेक्ट का कंबीनेशन बनाकर आवेदन फार्म में भरा जाए। यह सब्जेक्ट वे होते हैं, जो ज्यादातर बच्चे नहीं लेते। ऐसे में येन-केन-प्रकारेण उनका कालेज में दाखिला लेने का टारगेट पूरा हो जाता है, लेकिन अपनी वास्तविक रुचि के सब्जेक्ट नहीं पढ़ पाने की वजह से उनके रिजल्ट पर असर पड़ता है, जबकि मनपसंद सब्जेक्ट चाहने वाले बच्चे वैकल्पिक (दूसरा) आवेदन फार्म नहीं भर पाने की वजह से दाखिले की लाइन से बाहर हो जाते हैं।

आवेदन करने वाले बच्चों को देने पड़े करोड़ों रुपये

राज्यपाल ने बातचीत के दौरान इस बात पर भी चिंंंता जाहिर की है कि आवेदन फार्म भरने वाले प्रत्येक बच्चे से कम से कम 50 रुपये फीस में वसूल किए जा रहे हैं। गांवों में चूंकि इंटरनेट अक्सर ठप रहता है। इसलिए बच्चों को प्राइवेट कैफे पर जाकर भी अपने फार्म भरने पड़े हैं, जिसकी एवज में एक फार्म भरने पर बच्चे को 50 से 100 रुपये तक खर्च करने पड़े। यह राशि करोड़ों रुपये की बनती है। राज्यपाल को सुझाव दिया गया कि आवेदन के समय ली जाने वाली फीस में इस राशि को खत्म किया जाना चाहिये। संपूर्ण सिंह ने समस्त राशि सीधे उच्च शिक्षा निदेशालय को जाने तथा कालेजों का हिस्सा समय से कालेजों में नहीं पहुंचने का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा कालेजों में प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त करने के प्रयासों का विरोध करते हुए संपूर्ण सिंह ने कहा कि हर विश्वविद्यालय पर कम से कम 50 लाख रुपये महीने का अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा। यह फैसला आर्थिक रूप से कमजोर विश्वविद्यालयों की प्रगति में बाधा बनेगा। सहित रिपोर्ट।

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